ZEE Jaankari: इमरान खान PoK प्रेम अचानक इतना क्यों बढ़ गया है

ZEE Jaankari: इमरान खान PoK प्रेम अचानक इतना क्यों बढ़ गया है

अब हम आपको पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के मुज़्ज़फराबाद लेकर चलेंगे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने आज PoK में एक रैली की है. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद ये दूसरा मौका था, जब इमरान ख़ान PoK पहुंचे. इस्लामाबाद से मुज़्ज़फराबाद की दूरी लगभग 132 किलोमीटर है. और 31 दिनों के अंदर दूसरी बार इमरान ख़ान ने ये दूरी तय की है.

10 महीनों के कार्यकाल में वहां के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद अब्बासी ने एक बार PoK का दौरा किया. नवाज़ शरीफ और यूसूफ रज़ा गिलानी ने अपने कार्यकाल में तीन बार पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर का दौरा किया. जबकि 9 महीनों के कार्यकाल में राज़ा परवेज़ अशरफ एक बार भी वहां नहीं गए.

ऐसे में सवाल ये है, कि इमरान ख़ान को अचानक ऐसा क्या हुआ है कि उनका PoK प्रेम इतना बढ़ गया है. इसके पीछे की एक वजह हैं, उनके राजनीतिक विरोधी. जो इमरान ख़ान पर आरोप लगाते हैं, कि उनके कार्यकाल में मुज़्ज़फराबाद, पाकिस्तान से छीनने वाला है. इसीलिए इमरान ख़ान ने 31 दिनों के अंदर दूसरी बार PoK का दौरा किया. हालांकि, उनकी रैली में कुछ भी नया नहीं था. इमरान ख़ान का इरादा, कश्मीर के नाम पर वही पुराना और घिसा-पिटा एजेंडा चलाना था. हालांकि, इसके लिए PoK में जिस स्थान को चुना गया था. उस पर हमें ध्यान देने की ज़रुरत है.

इमरान ख़ान ने अपने जलसे के लिए मुज़्ज़फराबाद में स्थित खुर्शीद हसन खुर्शीद Football Stadium को चुना था. इस Stadium को आप कश्मीर छीनने वाला 'जिन्ना Plan' भी कह सकते हैं. इसे समझने के लिए आपको 72 वर्ष पहले Flash Back में जाना होगा. जब पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने PoK के पूर्व राष्ट्रपति खुर्शीद हसन खुर्शीद के साथ मिलकर कश्मीर वाली साज़िश रची थी. लेकिन उससे पहले ये समझना ज़रुरी है, कि आज इमरान ख़ान ने क्या कहा ? आज इमरान ने भारत को युद्ध की धमकी दी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया. और PoK के लोगों को उकसाते हुए कहा, कि जब मैं बोलूं, तब घुसपैठ करना. आप इसे इमरान खान का भाषण नहीं. बल्कि भारत में आतंकवाद फैलाने के मुद्दे पर उनका कबूलनामा भी कह सकते हैं. आज PoK में इमरान ख़ान ने 27 सितम्बर को United Nations General Assembly में दी जाने वाली Speech का ट्रेलर दिखाया है. क्योंकि उस दिन भी वो यही Script पढ़ेंगे.

इमरान ख़ान ने आज जो बातें कहीं हैं. उन बातों का 72 वर्ष पुराना एक इतिहास भी है. मुज़्ज़फराबाद स्थित Football Stadium को खुर्शीद हसन खुर्शीद के नाम पर बनाया गया है. खुर्शीद हसन, पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के निजी सचिव हुआ करते थे.

ऐसा कहा जाता है, कि मोहम्मद अली जिन्ना ने किसी ज़माने में ये टिप्पणी की थी, कि पाकिस्तान को वजूद में लाने के लिए, वो, उनके निजी सचिव और उनका Typewriter ज़िम्मेदार था. वर्ष 1947 की गर्मियों में मोहम्मद अली जिन्ना ने खुर्शीद हसन को Mission कश्मीर की ज़िम्मेदारी सौंपी. और कहा, कि जम्मू-कश्मीर का पाकिस्तान में विलय कराने के लिए वो महाराजा हरि सिंह के साथ एक सौदा करें. लेकिन खुर्शीद हसन द्वारा कई हफ्तों तक खुशामद करने के बावजूद हरि सिंह नहीं माने.

इसके बाद खुर्शीद हसन ने मोहम्मद अली जिन्ना को अपनी रिपोर्ट सौंपी. और सुझाव दिया, कि पाकिस्तान को कश्मीर के लिए जंग लड़नी होगी. खुर्शीद हसन का एक सुझाव ये भी था, कि कश्मीर पर आक्रमण के लिए कबायलियों को हथियार उपलब्ध कराए जाएं. और इस Operation को Major रैंक का अधिकारी Lead करे.

ऐसा कहा जाता है कि 12 अक्टूबर 1947 को खुर्शीद हसन ने मोहम्मद अली जिन्ना को लिखा था...कि जहां तक कश्मीर का मामला है, पाकिस्तान को आक्रमण के बारे में विचार करना चाहिए. कबायलियों को हथियार और खाने-पीने का सामान मुहैया कराना चाहिए. उन्होंने ये भी लिखा था, कि मेजर खुर्शीद अनवर रावलपिंडी में मौजूद हैं. और उनसे संपर्क स्थापित करके इस काम के लिए उनपर भरोसा किया जा सकता है. एक तथ्य ये भी है, कि मेजर खुर्शीद अनवर ने पश्तुन कबायलियों को कश्मीर पर हमले के लिए संगठित करना शुरु भी कर दिया था.

इसके 10 दिन बाद 22 अक्टूबर को पाकिस्तान की सेना और हथियारों से लैस कबायलियों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया. और एक बड़े इलाके पर कब्ज़ा कर लिया. जिसके जवाब में भारत ने सैन्य कार्रवाई की. उस वक्त खुर्शीद हसन श्रीनगर में ही थे. और उन्हें भरोसा था, कि पाकिस्तान की सेना पूरे जम्मू-कश्मीर को कब्ज़े में ले लेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्हें 2 नवंबर 1947 को गिरफ्तार कर लिया गया. बाद में मोहम्मद अली जिन्ना ने पंडित नेहरु को चिट्ठी लिखकर खुर्शीद हसन की रिहाई की मांग की. वर्ष 1949 में उन्हें कैदियों की रिहाई के बदले में हुई एक Deal के तहत छोड़ दिया गया. और इसके 10 वर्ष बाद, मई 1959 में पाकिस्तान के तत्कालीन तानाशाह और राष्ट्रपति अयूब ख़ान ने उन्हें पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर का राष्ट्रपति बना दिया.

यानी जो परिस्थिति 72 साल पहले उत्पन्न हुई थी. और खुर्शीद हसन ने जिन्ना को कबायलियों की मदद से कश्मीर पर आक्रमण की सलाह दी थी. बिल्कुल वही काम आज इमरान ख़ान ने किया है. अपने भाषण में इमरान ख़ान ने भारत के मुसलमानों का भी ज़िक्र किया. और उन्हें कश्मीर के नाम पर उकसाने की कोशिश की. लेकिन वो ये भूल गए, कि कल ही भारत के मुसलमानों ने साफ कर दिया है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. और हर कश्मीरी भारत का नागरिक हैं. आज इमरान ख़ान को एक बार फिर ये बातें कान खोलकर सुननी चाहिए. PoK में इमरान ख़ान के जलसे का एक सच ये भी था, कि वहां इकट्ठा हुई भीड़ खुद नहीं आई थी. बल्कि उन्हें एबटाबाद और रावलपिंडी से ट्रकों में भर कर लाया गया था. ...और ये दावा पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के राजनीतिक कार्यकर्ता कर रहे हैं.

अब ये देखिए, कि एक TV इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने किस प्रकार अपने देश को Defend किया. और कहा, कि अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका ने पाकिस्तान के मुजाहिदीनों को जेहाद के नाम पर ट्रेनिंग दी थी. और जब अमेरिका को अफगानिस्तान में कामयाबी नहीं मिली, तो उसी जेहाद को आतंकवाद कहा जाने लगा. और इस आतंकवाद का सारा दोष पाकिस्तान पर थोप दिया गया.

भारत लगातार दुनिया को ये बताता रहा है कि पाकिस्तान अपनी धरती का इस्तेमाल आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए करता है. और यही सच, आज इमरान खान ने स्वीकार कर लिया है. पाकिस्तान अपनी सुविधा के मुताबिक इन आतंकवादियों को अलग अलग नाम देता रहा है... कभी उन्हें मुजाहिदीन कहा जाता है, तो कभी जेहादी. आज आपको इमरान खान के मुजाहिदीन ट्रेनिंग वाले कबूलनामे का... इतिहास भी जानना चाहिए. इसके लिए आपको 40 वर्ष पहले हुए अफगानिस्तान युद्ध को समझना पड़ेगा.

वर्ष 1979 में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति नूर मोहम्मद तराकी, की हत्या के बाद... सोवियत संघ की सेना, अफगानिस्तान में दाखिल हो गई. उस वक्त Leonid Brezhnev (लियोनिड ब्रेजनेव) सोवियत संघ के राष्ट्रपति थे. सोवियत संघ की कोशिश, अफगानिस्तान पर कब्जा करके एशिया और Middle East में अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाना था . वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी सरकार ने खुलकर सोवियत संघ का साथ नहीं दिया... लेकिन संयुक्त राष्ट्र में सोवियत संघ के पक्ष में बयान दिया था .

तब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच Cold War यानी शीत युद्ध चल रहा था. वर्चस्व की लड़ाई में अमेरिका ने इस मौके का इस्तेमाल... सोवियत संघ से बदला लेने के लिए किया. वर्ष 1980 में अमेरिका के राष्ट्रपति Jimmy Carter(जिमी कार्टर) ने पाकिस्तान की मदद से... दुनिया भर से इस्लामिक लड़ाकों को ट्रेनिंग देने का प्लान बनाया गया. तब पाकिस्तान में राष्ट्रपति जिया उल हक का शासन था. अमेरिका के करीब आने के लिए पाकिस्तान, बिना समय गंवाये इसमें शामिल हो गया. सिर्फ अमेरिका ने मुजाहिदीनों की ट्रेनिंग और हथियार के लिए 20 Billion Dollar दिए थे... जो आज करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए के बराबर हैं.

सोवियत संघ से लड़ने वाले इन विद्रोहियों को मुजाहिदीन का नाम दिया गया. बताया ये भी जाता है कि आतंकवादी ओसामा बिन लादेन... और उसके आतंकवादी संगठन अल कायदा को भी अमेरिका ने बड़ी मदद दी थी. करीब 10 वर्षों तक मुजाहिदीनों से संघर्ष के बाद वर्ष 1989 में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान से अपनी सेनाएं हटा लीं थी. वर्ष 1989 के बाद अमेरिका ने मुजाहिदीनों के लिए पैसे देना बंद कर दिया.

इसके बाद, वर्ष 1992 में इन्हीं मुजाहिदीनों ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा करके सरकार बना ली. लेकिन पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान में ज्यादा कट्टर और अपने नियंत्रण वाली सरकार बनाना चाहता था. इसलिए पाकिस्तान ने इस्लामिक कट्टरपंथी गुट तालिबान बनाया. तालिबान...तालिब शब्द का बहुवचन है जिसका मतलब छात्र होता है. पाकिस्तान में शरण लेने वाले अफगान युवकों को तालिबान में शामिल किया गया था और उन्हें मदरसों में कट्टर इस्लाम की शिक्षा भी दी गई थी.

अमेरिकी हथियारों और पाकिस्तानी सेना की ट्रेनिंग से लैस तालिबान ने... वर्ष 1996 में अफगानिस्तान के ज्यादातर इलाके पर कब्जा कर लिया. इसके बाद अफगानिस्तान... आतंकवादियों का International ट्रेनिंग कैंप बन गया. अफगानिस्तान में सोवियत संघ का मुकाबला करने के लिए जो फॉर्मूला बनाया गया था... वही 90 के दशक में कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के काम आया. बाद में ये आतंकवादी पाकिस्तान के कंट्रोल से भी बाहर हो गए.

वर्ष 2001 में 11 सितंबर को New York के World Trade Center पर आतंकवादी हमला हुआ. इसकी जिम्मेदारी अफगानिस्तान में मौजूद आतंकवादी ओसामा बिन लादेन ने ली थी. इस हमले के बाद अमेरिका उसी तालिबान को उखाड़ फेंकने के लिए अफ़गानिस्तान आया जिसे उसने खुद पैदा किया था .


(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from Zee News.)