Zee Jaankari: अनौपचारिक माहौल में पीएम मोदी के अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का विश्लेषण

Zee Jaankari: अनौपचारिक माहौल में पीएम मोदी के अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का विश्लेषण

ये पहला मौका नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के किसी बड़े देश के नेता को भारत दर्शन कराया है. ये मोदी की कूटनीति का सबसे शानदार स्टाइल है. जिसमें वो दुनिया के नेताओं का भारत की संस्कृति से परिचय कराते हैं और इसी दौरान उन्हें भारत की अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति भी अच्छी तरह से समझा देते हैं और ये सब बहुत अनौपचारिक माहौल में होता है. आज हम कुछ पुरानी तस्वीरों के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी की भारत भ्रमण वाली कूटनीति का एक वीडियो विश्लेषण कर रहे हैं. जिसे आज आपको ज़रूर देखना चाहिए.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ये दो ऐसे मजबूत नेता जहां भी जाते हैं दुनिया की निगाहें इन पर होती हैं. दोनों Global Leader हैं और विश्व के दो बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष हैं. लेकिन इन समानताओं के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग अलग-अलग व्यक्तित्व हैं. दोनों नेताओं की सबसे बड़ी खासियत है इनका जमीन से जुड़ा होना. प्रधानमंत्री मोदी ने प्रचारक से प्रधानमंत्री बनने का सफर तय किया तो शी जिनपिंग चीन में शासन करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी में पार्टी सेक्रेटरी पद से प्रेसिडेंट की कुर्सी तक पहुंचे हैं.

मोदी और जिनपिंग अपने-अपने देश की राजनीति में सबसे शक्तिशाली नेता हैं. जिन्हें चुनौती देने वाला कोई नेता नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी लगातार दो बार बड़े बहुमत से चुनाव जीत चुके हैं. देश के 16 राज्यों में बीजेपी गठबंधन की सरकार है. इसी तरह शी जिनपिंग लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति बने हैं. इसके साथ ही जिनपिंग चीन की सेना People's Liberation Army के सुप्रीम कमांडर भी हैं. मोदी और जिनपिंग सत्ता में लंबे समय तक बने रहने का एजेंडा लेकर आए हैं. प्रधानमंत्री मोदी लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीतकर वर्ष 2024 तक सत्ता में रहेंगे. चीन में शी जिनपिंग वर्ष 2023 तक सत्ता में बने रहेंगे. लेकिन वो जब तक चाहें राष्ट्रपति बने रह सकते हैं.

दोनों नेताओं की विदेश नीति में पड़ोसियों का बड़ा रोल है. प्रधानमंत्री मोदी अपने पड़ोसी देशों के साथ नए समीकरण बनाने में विश्वास रखते हैं. शी जिनपिंग भी चीन के सीमावर्ती देशों से मजबूत रिश्ते रखने की बात करते हैं. लेकिन इन रिश्तों में चीन का एजेंडा सबसे ऊपर होता है. कुछ मतभेदों के बावजूद मोदी और जिनपिंग में कई समानताएं हैं. इन नेताओं को दोनों देशों की जनता का पूरा समर्थन है और अगर ये दोनों नेता साथ आ जाएं तो इनके पास दुनिया बदलने का मौका है.


(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from Zee News.)