Zee Jaankari: 2019 में नेता कह रहे हैं, तुम मुझे वोट दो, मैं तुम्हें चालान से आजादी दूंगा!

Zee Jaankari: 2019 में नेता कह रहे हैं, तुम मुझे वोट दो, मैं तुम्हें चालान से आजादी दूंगा!

अब एक ऐसी खबर जो पिछले 12 दिनों से चर्चा में हैं. और हर दिन उसे अलग-अलग राज्यों में सरकारें Red Signal दिखा रही है. ये खबर नए ट्रैफिक कानून से जुड़ी है.देश में नए ट्रैफिक नियम के लागू होने के बाद...लोग अपनी ही जान बचाने के खिलाफ हो गए हैं . और इसमें नेता वोट का खेल खेल रहे हैं. अनुशासन सिखाने के लिए बनाए गए कानून में राजनीति की एंट्री हो गई है. अब देश भर में 12 राज्य बढ़े हुए Traffic जुर्माने के खिलाफ हैं. इनमें से 5 बीजेपी शासित राज्य हैं. गुजरात और उत्तराखंड की तरह उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की सरकारें भी जुर्माने में कटौती पर विचार कर रही है.

उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने कहा है कि जनता के हित में नए Traffic नियम पर विचार हो रहा है. यूपी का परिवहन विभाग भी जुर्माने में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर रहा है. मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने नए ट्रैफिक नियम को तुगलकी फरमान बता दिया.

मतलब ये कि देश में Motor Vehicles Amendment Act पर सियासत चरम पर हैं. ऐसा लग रहा है कि आजादी की लड़ाई में जिस तरह सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि...तुम मुझे खून दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा . 2019 में नेता कह रहे हैं...तुम मुझे वोट दो, मैं तुम्हें चालान से आजादी दूंगा .देश में नेता वोट के लिए लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं. और इसका Negative असर भी दिख रहा है. आज पटना में लोगों ने Traffic पुलिस के खिलाफ हंगामा किया . कार और मोटरसाइकिल की चेकिंग कर रहे Traffic पुलिस वालों के विरोध में नारे लगाए. लोगों ने पुलिस जीप के ड्राइवर को ही पीट दिया.

हंगामे की वजह से वहां Traffic जाम हो गया . और जब पुलिसवाले जाम खुलवाने पहुंचे तो उनके साथ भी झड़प हुई . पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा. आप जरा सोचिए, देश में हत्या की सज़ा फांसी है. नाबालिग से रेप की सजा फांसी है. हर अपराध के लिए कानून में सजा का प्रावधान है. और ये इसलिए है कि अपराधी के भीतर खौफ हो .

और वो अपराध करने से पहले 100 बार सोचें. भविष्य में कोई कानून ना तोड़ें . मगर यहां के नेताओं को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. वो वोट के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं. हालात ये हैं कि लोग नए नियम के विरोध में कानून के काम में रुकावट बन रहे हैं. लोगों की नाराजगी से पुलिस की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं. नए Motor Vehicles Act में जुर्माने को कई लोग ज्यादती मान रहे हैं .

अब सवाल ये है कि क्या नए Traffic कानून में जुर्माना...देश हित में नहीं है . केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मानते हैं कि जुर्माना लोगों की जान से ज्यादा अहम नहीं . लोगों की जिंदगी बचाने के लिए कानून का सम्मान करना ही चाहिए .आप अच्छी तरह जानते हैं कि नए ट्रैफिक नियम आपकी जिंदगी बचाने के लिए हैं.

अगर आप सुरक्षित हैं तो आपका परिवार सुरक्षित हैं. आप ये बात जानते भी हैं, लेकिन मानते नहीं हैं .सड़क पर आपकी ज़िंदगी बचाने वाला हेलमेट...आपका सबसे भरोसेमंद साथी है. लेकिन य़े दुखी करने वाली बात है कि आप हेलमेट को अपना साथी नहीं सिरदर्द समझते हैं . और जुर्माने से बचने के लिए खराब Quality का हेलमेट खरीदते हैं.

आपको बता दें कि खराब Quality का सस्ता हेलमेट मौत का सामान है. पहले आप 105 वर्ष पुरानी इस तस्वीर को देखिए. हेलमेट पहने हुए व्यक्ति का नाम C.G PULLIN है . और ये मई 1914 में बाइक रेस में हेलमेट पहनकर शामिल हुए थे . ये तस्वीर ऐतिहासिक है. क्योंकि माना जाता है कि 1914 में पहली बार सिर की सुरक्षा के लिए बाइक रेस में हेलमेट का इस्तेमाल हुआ था .

अब जरा सोचिए की 105 वर्ष पहले जिसे दुनिया ने सुरक्षा के लिए जरूरी माना. हम 105 वर्ष बाद भी उसका विरोध कर रहे हैं. क्योंकि हमें खुद की और दूसरों की जिंदगी की परवाह नहीं है. नए Traffic कानून में बिना हेलमेट के बाइक चलाने पर 1000 रुपये का जुर्माना है. जो पहले 100 रुपये था. मतलब ये कि अब जुर्माना 10 गुना ज्यादा है. लोग इससे बचने के लिए 100 से 150 रुपए में बिना ISI मार्क वाला हेलमेट खरीद रहे हैं.

ऐसे हेलमेट भले ही आपको सस्ते में मिल जाए लेकिन ये नकली दवाओं की तरह ही खतरनाक है . जिसका ना तो असर होता है और ना ही 100 फीसदी सुरक्षा मिलती है. हादसा होने पर ये मौत की वजह बन जाते हैं. लोकल हेलमेट बेचने वालों पर कार्रवाई भी नहीं हो पाती है. क्योंकि सरकार के पास इनका कोई रिकॉर्ड नहीं होता.

Central Motor Vehicle Act, 1988 के Section 129 में साफ लिखा है कि...हेलमेट ISI मार्क वाला ही होना चाहिए. ISI यानी Indian Standard Institute...इसके जरिए ही सरकार सामान की गुणवत्ता को नियंत्रित करती है. नियम के मुताबिक हेलमेट भी वही मान्य है जिसपर ISI 4151 Standard लिखा हो. हेलमेट इतना ढीला भी बांधना चाहिए की गले और फीते के बीच दो उंगली घुसने की जगह हो.

कानून के मुताबिक अगर हेलमेट का फीता नहीं लगा है तो आपको जुर्माना देना पड़ सकता है. और तीन महीने तक लाइसेंस निलंबित हो सकता है. अब आपको सिर्फ ISI मार्क वाला हेलमेट ही खरीदना है. साथ ही हेलमेट के फीते का भी ध्यान रखना है. इससे आप जुर्माने के साथ साथ सिर की सुरक्षा भी कर पाएंगे.

क्योंकि बाइक Accident के ज्यादातर मामलों में 80 प्रतिशत लोगों को सिर में चोट लगती है. ऐसे लोगों के सिर में या तो हेलमेट नहीं होता है या फिर खराब हेलमेट होता है. हेलमेट ठीक से नहीं बंधे होने पर सिर को गंभीर चोट लग सकती है. World Health Organization की एक Study बताती है कि....अगर तय मानक के हेलमेट पहने जाएं तो सड़क दुर्घटना से होने वाली मौत में 60 प्रतिशत तक की कमी आती है.

AIIMS के रिसर्च के मुताबिक बेकार हेलमेट में फोर्स सहने की क्षमता नहीं होती. और Accident होने पर ब्रेन injury होती है. हेलमेट टूटकर मुंह, गर्दन या सिर में घंस सकता है. और लोगों की जान जा सकती है. खराब हेलमेट से बीमा क्लेम लेने में भी दिक्कत आती है. अगर FIR में बेकार हेलमेट की बात लिखी होती है तो क्लेम रद्द भी हो सकता है.

इसलिए Traffic पुलिस को सड़क पर जांच के दौरान...हेलमेट चेक करने के साथ ही उनका मानक भी चेक करना चाहिए .2015 में भारत में सड़क हादसों में 1 लाख 46 हज़ार लोगों की मौत हुई थी..और इनमें से ज्यादातर मौतें ट्रैफिक नियमों का पालन ना करने की वजह से हुईं. भारत में हर वर्ष हेलमेट नहीं पहनने की वजह 36 हजार से ज्यादा लोगों की मौत होती है.यानी हेलमेट पहनने की एक अच्छी आदत से हर दिन 100 लोगों की जान बच सकती है. जिस हेलमेट को पहनकर आप जुर्माना बचा रहे हैं...उससे आपकी जिंदगी को खतरा है.

अब आपको चुनना है कि आप ट्रैफिक पुलिस से चालान कटवाना चाहते हैं या मौत से चालान कटवाना चाहते हैं ? कुल मिलाकर संदेश ये है कि हमारी गलती मौत का कारण ना बने . क्योंकि Driving के साथ-साथ समाज के प्रति भी आपकी ज़िम्मेदारी है. हम जानते हैं कि किसी भी कानून को लागू करना मुश्किल है. लेकिन नए नियम से लोगों को ही नहीं बल्कि पर्यावरण को भी फायदा होगा.... दिल्ली में पिछले 10 वर्षों में सबसे गर्म सितंबर महीने का नया रिकॉर्ड बना है. बुधवार को तापमान 39.5 Degree Celsius तक पहुंच गया .

अगर हम नियमों का पालन करते तो हालात बदल सकते थे . चीन की राजधानी बीजिंग इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं. कुछ वर्ष पहले तक बीजिंग दुनिया के सबसे प्रदूषित TOP 5 शहरों में था. लेकिन वहां कानून की सख्ती का असर दिखा. अब बीजिंग TOP 200 प्रदूषित शहरों की लिस्ट में भी नहीं है.

दरअसल नए नियमों का विरोध हमारे देश और समाज के चरित्र में शामिल हो गया है. हम हर बदलाव का विरोध करते हैं. सोचिए अगर हर कोई नियमों को अंगूठा दिखाकर....अपनी मनमर्ज़ी करेगा...तो हमारे देश में सुरक्षित सफर की कल्पना नहीं की जा सकती. इसलिए भारत में ट्रैफिक से जुड़े कानूनों में हुए ऐतिहासिक बदलाव का हमें स्वागत करना चाहिए.

हम चाहते हैं कि आज ये DNA टेस्ट देखने के बाद आप सड़क पर पूरी ज़िम्मेदारी के साथ ड्राइविंग करें, ISI मार्क वाला हेलमेट पहने और सभी ट्रैफिक नियमों का पालन करें .


(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from Zee News.)