महाबलीपुरम के बीच पर पीएम मोदी जो कर रहे थे, उसे 'प्लॉगिंग' क्यों कहते हैं

महाबलीपुरम के बीच पर पीएम मोदी जो कर रहे थे, उसे 'प्लॉगिंग' क्यों कहते हैं
तमिलनाडु (Tamilnadu) में चेन्नई के पास के शहर महाबलीपुरम (Mahabalipuram) में पीएम मोदी (PM Modi) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के बीच मुलाकात हुई. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी का एक वीडियो काफी पॉपुलर हो रहा है. प्रधानमंत्री मोदी महाबलीपुरम में समंदर के किनारे पड़े प्लास्टिक और दूसरे कूड़े-कचरे को उठाकर जमा कर रहे हैं.

पीएम मोदी महाबलीपुरम के बीच पर मॉर्निंग वॉक करने निकले थे. इस दौरान उन्होंने बीच पर प्लास्टिक और दूसरा कूड़ा-कचरा देखा तो मार्निंग वॉक करते हुए ही वो प्लास्टिक का कचरा बीनने लगे. प्रधानमंत्री मोदी ने इसका वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर रिलीज किया.

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि समंदर किनारे टहलते हुए पीएम मोदी प्लास्टिक के कूड़े-कबाड़ को एक प्लास्टिक की थैली में जमा कर रहे हैं. तीन मिनट के इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी जो करते दिख रहे हैं उसे 'प्लॉगिंग' (Plogging) कहते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए भी लिखा है- Plogging at a beach in Mamallapuram this morning. It lasted for over 30 minutes. यानी सुबह-सुबह मामल्लपुरम के बीच पर प्लॉगिंग. ये आधे घंटे तक चला. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा है कि इकट्ठा हुए कचरे को मैंने होटल स्टॉफ जयाराज को सौंपा. हम इस बात को सुनिश्चित करें कि पब्लिक एरिया साफ सुथरा हो. ये भी ध्यान रखें कि हम हमेशा चुस्त दुरुस्त रहें.


प्लॉगिंग है क्या ? 

प्रधानमंत्री मोदी महाबलीपुरम या मामल्लपुरम के बीच पर जो कर रहे थे, वही प्लॉगिंग है. प्लॉगिंग का मतलब होता है- टहलते या दौड़ते वक्त रास्ते पर पड़े कूड़े-कचरे को इकट्ठा करते जाना. इस कूड़ा-कचरे में प्लास्टिक के बोतल, कागज, पन्नियां या इस तरह की दूसरी गदंगी फैलाने वाली चीजें हो सकती है. प्लॉगिंग एक नया शब्द है, जो हाल ही में स्वीडेन से चलन में आया है. स्वीडेन से पैदा हुआ ये शब्द अब ग्लोबल हो चुका है. दुनिया के कई देशों में पर्यावरण और फिटनेस के प्रति सचेत लोग इस शब्द को अपना रहे हैं. प्लॉगिंग को ये लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर रहे हैं.

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महाबलीपुरम बीच पर पीएम मोदी


प्लॉगिंग शब्द कैसे पैदा हुआ ?

इस शब्द का चलन 2016 में एक स्वीडिश नागरिक एरिक अहलस्ट्रोम ने शुरू किया. एरिक ने स्वीडेन में प्लॉगिंग मूवमेंट की शुरुआत की थी. दरअसल काम पर जाने के दौरान एरिक देखते थे कि सड़क किनारे काफी मात्रा में कचरा और प्लास्टिक का कूड़ा पड़ा रहता है. वो इस कूड़े-कचरे को देखकर परेशान हो गए थे. इसलिए उन्होंने मॉर्निंग वॉक के दौरान इस कूड़े कचरे की सफाई का अभियान चलाया.

प्लॉगिंग दो शब्दों के मेल से बना है. ये दो शब्द हैं ‘pick’ और ‘jog’. यानी जॉगिंग करते वक्त ‘pick’ करना. Pick को स्वीडिश भाषा में ‘plocka’ कहते हैं, इस तरह से दोनों शब्दों के मेल से Plogging शब्द आया. स्वीडेन से आए प्लॉगिंग शब्द और उसके कॉन्सेप्ट को आज पूरी दुनिया ने अपनाया है. अब ये भारत में भी पॉपुलर हो रहा है.

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प्लॉगिंग शब्द गढ़ने वाले एरिक अहलस्ट्रोम


भारत में 10 हजार लोग प्लॉगिंग से जुड़े हैं

स्टॉकहोम के एक कार्यक्रम में एरिक ने प्लॉगिंग शब्द के बारे में विस्तार से बताया था. एरिक ने बताया कि कि मैं सड़के किनारे पड़े कचरे को देखकर हैरान रह जाता था. सड़क पर कई हफ्तों तक कचरा पड़ा रहता. उसे कोई नहीं हटाता. मैं टहलने के दौरान कूड़े कचरे को उठाने का फैसला किया. ऐसा करने में मुझे अच्छा महसूस हुआ. मैंने मॉर्निंग वॉक करने के दौरान एक छोटे से हिस्से को क्लीन करने में भी कामयाबी पाई. ये अच्छा निर्णय था.

नेचर और फिटनेस के जुनूनी लोगों ने प्लॉगिंग के कॉन्सेप्ट को तेजी से अपनाया. ये सबसे ज्यादा मैक्सिको में पॉपुलर है. वहां हर दिन 4 हजार लोग रोज प्लॉगिंग करते हैं. एरिक अहलस्ट्रोम ने बताया कि भारत में भी करीब 10 हजार लोग प्लॉगिंग से जुड़े हैं. प्लॉगिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है.

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प्लॉगिंग का कॉन्सेप्ट तेजी से बढ़ रहा है


एरिक अहलस्ट्रोम का मानना है कि ये पर्यावरण और सेहत दोनों के लिए ठीक है. प्लॉगिंग में नॉर्मल वॉक से ज्यादा कैलोरी बर्न होती है. मॉर्निंग वॉक में आप सीधा चलते जाते हैं. लेकिन प्लॉगिंग में आपको कूड़ा कचरा उठाने के लिए झुकना पड़ता है, हाथ नीचे करना पड़ता है. इस मूवमेंट की वजह से ज्यादा कैलोरी बर्न होती है. इसलिए ये सेहत के लिए भी ठीक है. साथ ही पर्यावरण भी साफ रहता है. बिना किसी अतिरिक्त मशक्कत के सफाई भी हो जाती है.

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)