आप सड़कों पर करते हैं सफर तो हो जाएं चौकन्ने, वरना ट्रैफिक सिग्नल से हो जाएगा नुकसान!

आप सड़कों पर करते हैं सफर तो हो जाएं चौकन्ने, वरना ट्रैफिक सिग्नल से हो जाएगा नुकसान!

नई दिल्ली: राजधानी की सड़कों पर लगे साइन बोर्ड संकेतक ट्रैफिक (traffic) में कई खामियां मिली हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक (traffic)एजुकेशन (आईआरटीई) की रिपोर्ट के मुताबिक, गलत संकेतकों और डिजाइन की खामी के कारण देश में हर रोज लाखों लोग ट्रैफिक (traffic)नियमों का उल्लंघन करते हैं. जिसमे से कुछ हजार लागों का ही चालान होता है. 70 प्रतिशत से ज्यादा सिग्नल मानक के मुताबिक नही है. 80 प्रतिशत फुटपाथ सही नही है. इसमें से 33.88 फीसदी उल्लंघन रोड डिजाइन की वजह से सामने आए हैं.

14 प्रमुख सड़कों पर किया सर्वे
दिल्ली की 14 प्रमुख सड़कों पर 1514 यातायात संकेतकों का अध्ययन किया गया. सर्वे में पाया गया कि 1098 यानी 75 फीसदी संकेतक तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं. वहीं 801 संकेतकों में रंगों की कमियां पाई गईं. पीडब्ल्यूडी ने मात्र सजावट के लिए इन संकेतकों को लगाया है. 30 जगहों पर रुकने का संकेतक ठीक नहीं मिला. 

जब सिग्नल्स  खराब है ना चाहते हुए भी गलती होती है. और आपको जुर्माना देना पड़ता है. सभी मार्गों पर गति सीमा 50-40 किमी प्रतिघंटा दिखी जिन सड़कों पर सर्वे किया गया उन पर लगे साइन बोर्ड में गति सीमा को 50 व 40 किलोमीटर प्रति घंटा दर्शाया गया है. कार के लिए 50 और भारी वाहनों के लिए 40 किमी प्रतिघंटा है. जबकि हर मार्ग की क्षमता के मुताबिक अलग-अलग गति सीमा होनी चाहिए.

यानी स्कूल  मार्किट, कॉलोनी में स्पीड कम होनी चाहिए लेकिन कोई साइन नही है. इतना ही नही राजधानी में स्पीड के 259 साइन में 241 स्टैंडर्ड के मुताबिक नही है. 93.05 प्रतिशत. वहीं, 316 जगहों में से 273 पर चेतावनी चिन्ह मानकों पर खरे नहीं उतरे. उनके लिए अलग-अलग रंगों का प्रयोग किया गया था. वार्निंग साइन 316 को एग्जामिन किया गया जिसमें से 273 मानक के मुताबिक नही है. इंफॉर्मेशन साइन 576 को सर्वे किया गया जिसमें से 185 स्टंडेर्ड के मुताबिक नही पाया गया.

ये प्रमुख मार्ग शामिल किए
राजेंद्र प्लेस से आरके आश्रम, लोधी रोड से हुमायूं का मकबरा, अक्षरधाम से नोएडा, मायापुरी से पंजाबी बाग, कश्मीरी गेट से आजादपुर, एमबी रोड से क्राउन प्लाजा, तुगलकाबाद से आश्रम, मोदी मिल से हौजखास,  सीलमपुर से गोकुलपुरी, मधुबन चौक से रिठाला, लाडो सराय से हौजखास, एयरपोर्ट से अग्रवाल चौक, केशव चौक से गाजीपुर.

63 प्रतिशत मौत नेशनल हाईवे ओर स्टेट हाईवे पर हिती है. हाई वे पर स्पीड रोकने के लिए कोई व्वस्था नही है. ड्रनकन ड्राइव के लिए भी  कोई चेकिंग के कोई पेट्रोलिंग नही है .ड्रनकन ड्राइव महानगरों ओर अर्बन एरिया  में होता है.  
67 प्रतिशत दुर्घटना ओवरस्पीड की वजह से होती है.

पैदल चलने वाले के लिए कोई जगह नही होता भीड़भाड़ वेक जगहों पर  किसी तरह लोग रोड क्रॉस करते है. दिल्ली में 2017 में 1584 लोगों की मौत हुई है. जबकि 2018 में 1690
2017 में  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चालान  का रेट बढ़ाने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़ी है. 2017 में ट्रैफिक (traffic)फाइन से 64.8 करोड़ की कमाई हुई. 2018 में 105 करोड़ की. 90 प्रतिशत आठ कोन वाके  स्टॉप के संकेत गलत तरीक़े से लगाया गया.


(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from Zee News.)