GST चोरी में देश की सबसे बड़ी रेड, 1200 अफसरों ने एक साथ 336 जगहों पर मारे छापे

GST चोरी में देश की सबसे बड़ी रेड, 1200 अफसरों ने एक साथ 336 जगहों पर मारे छापे
फर्जी कागजात के आधार पर जीएसटी रिफंड लेने वालों के खिलाफ जीएसटी सतर्कता महानिदेशालय (डीजीजीआई) और डायरेक्टर रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाया है. 15 राज्यों में 336 स्थानों पर छापेमारी के लिए 1200 अफसरों को लगाया गया था. बताया जाता है कि दोनों ही विभागों की टीम ने छापेमारी के दौरान 470 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और इसके आधार पर 450 करोड़ के आईजीएसटी रिफंड के दावों का भंडाफोड़ किया है.

अधिकारियों के मुताबिक छापेमारी कार्रवाई 11 सितंबर को एक साथ और एक ही समय पर राजधानी दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई शहरों में की गई. डेटा विश्लेषण के आधार पर अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि कुछ निर्यातक आईजीएसटी के आधार पर निर्यात कर रहे हैं और फर्जी या बहुत कम आपूर्ति दिखाकर पूरा इनपुट टैक्स क्रेडिट भी ले रहे हैं.

अभी तक की जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं उसके मुताबिक इस गोरखधंधे में शामिल निर्यातकों ने 3500 करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया था. मामले का खुलासा होने के बाद इन सभी निर्यातकों के माल पर रोक लगा दी गई है. खबर है कि अभी कुछ दिन और भी छापेमारी जारी रहेगी.

750 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है आंकड़ामामले की जांच कर रहे अधिकारियों के मुताबिक आईजीएसटी फर्जी रिफंड क्लेम की रकम 450 करोड़ से बढ़कर 750 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है. अभी तक की जांच में अधिकारियों को इस पूरे प्रकरण के मास्टर माइंड की जानकारी नहीं लग सकी है. अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी उस तक उनकी पकड़ भी मजबूत होती जाएगी.

क्या है आईजीएसटी
आईजीएसटी राज्यों के बीच सामान की आपूर्ति पर लगने वाला टैक्स है. किसी भी सामान का आयात और निर्यात इसी के दायरे में होता है. यह टैक्स केंद्र को मिलता है और इसे बाद में राज्यों में बांट दिया जाता है. वहीं, इनपुट टैक्स क्रेडिट किसी आपूर्तिकर्ता द्वारा कच्चे माल पर चुकाए गए टैक्स पर बाद में मांगा जाने वाला रिफंड है.
कैसे लगी इस जालसाजी की भनक
आमतौर पर निर्यातक-आपूर्तिकर्ता टैक्स का भुगतान नगदी व अन्य तरीकों से करते हैं लेकिन इन निर्यातकों ने टैक्स भरने के लिए एक भी रुपया नकद जमा नहीं किया. इन निर्यातकों ने इनपुट टैक्स क्रेडिट ज्यादा दिया लेकिन क्लेम का दावा काफी कम किया. इन्हीं से ये एजेंसियों के रडार पर आए गए.

(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)