किसी की सुइसाइडल टेंडेंसी को कैसे पहचानें और रोकें

किसी की सुइसाइडल टेंडेंसी को कैसे पहचानें और रोकें
आखिर क्या कारण है कि एक शख्स इतना लाचार और हताश हो जाता है कि उसके पास आत्महत्या (suicide) के सिवा कोई दूसरा चारा नहीं बचता. वो कैसी मनोस्थिति होती होगी जो इंसान को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दे? आत्महत्या करने वाला शख्स किस दौर से गुज़र रहा होता है और हम उन्हें मौत के मुंह में जाने से कैसे रोक सकते हैं? ये ऐसे सवाल हैं जो अक्सर हमारे ज़हन में उठते हैं. कभी अपने किसी दोस्त को डिप्रेशन से जूझते देखने पर तो कभी किसी रिश्तेदार के ज़हन में आत्महत्या करने का ख्याल आने पर.

आत्महत्या के पीछे कई कारण छुपे होते हैं, ऐसे में अगर आपके आसपास का कोई शख्स ऐसा करने का मन बना रहा है या बहुत ही उदास, निराश, अंधकार में डूबा हुआ, डिप्रेशन से जूझ रहा हो तो आप उसे ऐसे रोक सकते हैं-

सिग्नल पहचानें (signals of suicide)
  • सुइसाइड करने वाला शख्स अपने आसपास के लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बार-बार ये सिग्नल देता है कि आने वाले दिनों में वह सुइसाइड कर सकता है.

  • या तो वह आपसे बिल्कुल कटा-कटा रहेगा और या आपके साथ ऐसे समय बिताएगा जैसे वह अपनी जिंदगी के कुछ आखिरी दिन गुज़ार रहा हो.

  • जिंदगी जीने के प्रति अनिच्छा जताना
  • हमेशा मरने की बात करना

  • अपने लैपटॉप में सुइसाइड लेटर या नोट लिखकर सेव रखना

  • अपनी सभी महत्वपूर्ण चीजों के बारे में आपको ऐसे बताना जैसे उनके चले जाने के बाद आप ही को सब देखना,संभालना पड़ेगा

  • आज के टाइम में लोग सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं. ऐसे में उनके निराशाजनक फेसबुक स्टेटस भी एक संकेत हो सकते हैं

  • ब्रेकअप या किसी करीबी का दूर हो जाना


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मौत के मुंह में जाने से कैसे रोके इन्हें

  • डिप्रेशन (depression) से जूझ रहे लोग अक्सर बात करने से कतराते हैं. खासकर जान-पहचान वाले लोगों से. ऐसे में आप हमेशा उनके पास बैठिए र बात करने की कोशिश करिए

  • उन्हें ढ़ाढस बंधाइए. समझाइए कि वो जिस मानसिक स्थिति से गुज़र रहे हैं, उससे हर शख्स कभी न कभी गुजरता है

  • इस स्थिति को पार पा जाने में ही उनकी जीत है

  • उन्हें ज़हन से सुइसाइड का ख्याल निकालने को कहें

  • अगर आप बैचलर रहते हैं, तो अपने मित्र के माता-पिता को सूचित कर के बुला लें. ऐसी स्थिति में मां-बाप का साथ होना बेहद ज़रूरी है.

  • कभी भी भूलकर डांटे या चोट पहुंचाने वाली बात न कहें

  • बिना जजमेंटल हुए पीड़ित व्यक्ति की बात सुनें

  • बात करते समय ध्यान रखें कि उससे ऐसी कोई बात या सवाल न करें, जिससे वह उत्तेजित हो या बातचीत से पीछे हटे

  • उसका भरोसा जीतने की कोशिश करें

  • सुइसाइड रोकने वाली कई संस्थाएं भी मौजूद हैं. ऐसे में अगर स्थिति आपको नियंत्रण से बाहर लगे तो ऐसी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है.


Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)