सरकार का बड़ा खुलासा, WhatsApp के 121 यूजर्स की जासूसी की कोशिश की गई

सरकार का बड़ा खुलासा, WhatsApp के 121 यूजर्स की जासूसी की कोशिश की गई

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के 13वें दिन की कार्यवाही के दौरान केंद्र सरकार बताया कि इसी साल मई माह में 121 लोगों के मोबाइल डाटा में सेंध लगाने की कोशिश हुई थी, जिसमें 20 यूज़र्स के मोबाइल में संभवत: सेंध लग चुकी है. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सांसद दयानिधि मारन के सवाल पर केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने यह जवाब दिया.

इससे पहले भी रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि सरकार नागरिकों की गोपनीयता की सुरक्षा को लेकर पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल पर भी काम कर रही है और इसे संसद में जल्द पेश किया जाएगा. सरकार ने इस तथ्य पर ध्यान दिया है कि एक स्पाइवेयर/मैलवेयर ने कुछ व्हाट्सएप यूजर्स को प्रभावित किया है.

रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि व्हाट्सएप के अनुसार, इस स्पाइवेयर को इजरायल की एक कंपनी एनएसओ ग्रुप ने विकसित किया था. ग्रुप ने वैश्विक स्तर पर 1,400 यूजर्स की संभावित संख्या के मोबाइल फोन तक पहुंच बनाने के प्रयास में पेगासस स्पाईवेयर को विकसित किया. प्रभावित हुए यूजर्स में भारत के 121 लोग शामिल हैं.

सरकार ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भारत सरकार को कथित उल्लंघन के लिए बदनाम करने की कोशिश की गई है, यह 'पूरी तरह से भ्रामक' हैं.  सरकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबध है, जिसमें निजता का अधिकार भी शामिल है.

सरकार कानून और प्रोटोकॉल के प्रावधानों के अनुसार सख्ती से काम करती है. हैकिंग और स्पाईवेयर से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एक्ट 2000 में पर्याप्त प्रावधान हैं.

यहां बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को बहुप्रतीक्षित निजी डेटा संरक्षण विधेयक को मंजूरी दे दी और सरकार अब मौजूदा शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को पेश करेगी. केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने हालांकि मीडिया को विधेयक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और कहा कि इसके बारे में पहले सदन में चर्चा की जाएगी.

इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय(एमईआईटीवाई) ने कैबिनेट में विधेयक भेजा था और दूरसंचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाल ही में ऊपरी सदन को सूचित किया था कि डेटा संरक्षण कानून पर काम चल रहा है और इसे जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा.

प्रस्तावित कानून का भारत में संचालित एमएनसी पर काफी प्रभाव पड़ सकता है. साथ में या फिर बिना व्यक्तिगत उपस्थिति के, इसके डेटा स्थानीयकरण आवश्यकताओं और सीमा पार से डेटा ट्रांसफर प्रतिबंधों के चलते इसपर प्रभाव पड़ सकता है.

यूरोपीय संघ के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन(जीडीपीआर) के नक्शेकदम पर चलते हुए, सरकार ने बीते वर्ष सरकार और निजी कंपनियों द्वारा निजी डेटा के नियमन को लेकर निजी डेटा सुरक्षा विधेयक का एक मसौदा पेश किया था.

निजी डेटा संरक्षण विधेयक, 2018 नाम के मसौदा विधेयक को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी.एन. श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समूह ने तैयार किया था. माना जा रहा है कि विधेयक में निजी डेटा एकत्रीकरण, भंडारण और प्रक्रिया के लिए नियम होगा और साथ ही व्यक्तिगत सहमति, दंड और मुआवजा, आचार संहिता और उसे लागू करने का मॉडल भी उसमें शामिल होगा.


(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from Zee News.)