OPINION: नागरिकता संशोधन बिल–धार्मिक अत्याचार झेल रहे लोगों पर है मरहम

OPINION: नागरिकता संशोधन बिल–धार्मिक अत्याचार झेल रहे लोगों पर है मरहम
नागरिकता संशोधन बिल के बहाने मोदी सरकार ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से धार्मिक अत्याचार के विरोध में भारत में शरण के लिए आए लोगों पर मरहम लगाने का काम किया है. बिल का समर्थन कर रहे नेताओं का कहना है कि भारत से सटे तीनों देश मुस्लिम देश हैं, ऐसे में गैर मुस्लिमों को यहां लगातार धार्मिक कारणों से प्रताड़ित किया जा रहा है. यही कारण है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश देश और अफगानिस्तान से भाग कर ये लोग भारत आ रहे हैं.

भारत क्योंकि एक धर्मनिर्पेक्ष देश है, ऐसे में भारत की जिम्मेदारी बनती है कि इस इलाके में मुस्लिम देशों में धार्मिक अत्याचार झेल रहे नागरिकों को संंरक्षण दे. भारत ऐसा कर भी रहा है लेकिन नागरिकत पाने का रास्ता इतना कठिन है कि इन देशों से आए गैर मुस्लिम लोगों को भारत की नागरकित नहीं मिल पा रही है हालांकि इस बिल के कानून बन जाने से अब ये रास्ता आसान हो जाएगा.

मोदी सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से आसानी से पास हो जाएगा बिल
बुधवार को कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन विधेयक पास कर दिया है. लोकसभा और राज्यसभा के जो आकड़े हैं उससे साफ है कि सदन में ये बिल पास हो ही जाएगा और जल्द से जल्द ये बिल कानून बन जाएगा, हालांकि इस विधेयक पर भी एनआरसी और धारा 370 जैसा घमासान देखने को मिल रहा है. जिस तरह मोदी सरकार ने मजबूत इच्छा शक्ति से तीन तलाक बिल, धारा 370 जैसे बिल पास करा लिए उसके बाद ये बिल लोकसभा या राज्यसभा में रुकेगा इसकी उम्मीद न के बराबर है हालांकि विपक्ष इस बिल में कुछ संशोधन से खफा है लेकिन लोकसभा का गणित बताता है कि विपक्ष के पास हंगामें के अलावा कोई रास्त नहीं है, जिससे बिल लेट भले हो जाए लेकिन उसे पास होने से रोका नहीं जा सकता है.अब आसानी से मिलेगी नागरिकता
दरअसल लंबे समय से पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, परासी और ईसाई शरणार्थी भारत की नागरिकत की आस लगए बैठे हुए हैं. एक आकड़े के मुताबिक देश में नागरिकता की उम्मीद लगाए गैर मुस्लिम शरणार्थियों की संख्या करीब 1 करोड़ के आस-पास है , नागरिकत कानून 1955 के हिसाब से भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य होता है लेकिन नए संशोधन के बाद इस समय-सीमा को घटाकर 6 साल किया जा सकता है. साफ है सरकार पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों के आसानी से भारत की नागरिकता देने की तैयारी में है और इससे उनके उस घावों पर मरहम लगाने की कोशिश में है जिसके कारण वो अपना देश छोड़ने को मजबूर हुए थे.

(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)