ऑड-ईवन स्कीम से कितना कम होता है प्रदूषण, जानें क्या कहती है स्टडी

ऑड-ईवन स्कीम से कितना कम होता है प्रदूषण, जानें क्या कहती है स्टडी
दिल्ली (Delhi)  में एक बार फिर से ऑड-ईवन स्कीम (Odd Even Scheme) लागू करने की तैयारी चल रही है. दिल्ली में प्रदूषण (Pollution) से निपटने के लिए सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा है कि 4 से 15 नवंबर के बीच एक बार फिर से ऑड-ईवन स्कीम लागू की जाएगी. सर्दियों में दिल्ली में प्रदूषण काफी बढ़ जाता है.

प्रदूषण को कम रखने के लिए दिल्ली सरकार (Delhi Government) पहले ही ऑड-ईवन का फॉर्मूला लेकर आ गई है. हालांकि केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ऑड-ईवन स्कीम की जरूरत को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि अभी इसकी जरूरत नहीं है. लेकिन अरविंद केजरीवाल चाहते हैं तो ये स्कीम लागू कर दें.

ऑड-ईवन स्कीम पर अलग-अलग राय के बीच एक सवाल ये उठता है कि क्या इस स्कीम से प्रदूषण पर असर पड़ता भी है? क्या स्कीम लागू होने की वजह से प्रदूषण कम होता है? दिल्ली में पहले भी ये स्कीम लागू हो चुकी है. उस वक्त प्रदूषण का स्तर क्या रहा, क्या स्कीम की वजह से प्रदूषण का स्तर कम हुआ था?

2016 में दिल्ली में लागू हुई थी ऑड-ईवन स्कीम2016 में दिल्ली में ऑड-ईवन स्कीम लागू होने के बाद इसके असर को लेकर एक स्टडी की गई थी. इस स्टडी के मुताबिक 2016 में दिल्ली में लागू ऑड ईवन की वजह से प्रदूषण पर कुछ खास असर नहीं पड़ा था. स्टडी में बताया गया कि सिर्फ ट्रैफिक डेनसिटी को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. प्रदूषण बढ़ने के लिए कई चीजें जिम्मेदार हैं.

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सिर्फ ट्रैफिक डेनसिटी को पॉल्यूशन के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता


2016 में दिल्ली में 1 से 15 जनवरी के बीच ऑड ईवन फॉर्मूला लागू किया गया था. फॉर्मूला लागू होने के बाद किए गए स्टडी में पता चला कि स्कीम की वजह से प्रदूषण में कोई खास अंतर नहीं पड़ा. पीएम 2.5 और ब्लैक कार्बन जैसे प्रदूषणकारी तत्वों में नाममात्र का अंतर आया.
यहां तक की जैसी उम्मीद की जा रही थी, नतीजे उससे भी ज्यादा हैरान करने वाले निकले. दिल्ली में ऑड ईवन लागू होने के बाद पीएम 2.5 का लेवल और ज्यादा बढ़ा हुआ पाया गया. हवा में ब्लैक कॉर्बन की औसत मिलावट भी स्कीम लागू होने से पहले की तुलना में ज्यादा थी. ऑड ईवन स्कीम के लागू होने के बाद प्रदूषण के नतीजे निराशाजनक रहे थे. स्कीम का कोई असर नहीं दिखा था.

2016 में फेल रही थी ऑड-ईवन स्कीम

स्टडी में पता चला कि दिल्ली में ऑड ईवन लागू होने के पहले पीएम 2.5 का लेवल 163.51 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था. स्कीम लागू होने के दौरान पीएम 2.5 का लेवल बढ़कर 186.98 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो गया. स्कीम खत्म होने के बाद ये 197.45 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर था.

इसी तरह हवा में ब्लैक कार्बन की मिलावट स्कीम लागू होने से पहले 14.01 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी. स्कीम के दौरान हवा में ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़कर 19.87 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो गई. स्कीम खत्म होने के बाद इसकी मात्रा 17.79 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी.

ऑड ईवन लागू होने के बाद भी प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आई थी. उलटे उसमें बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी. इसके पीछे कई बातों को जिम्मेदार माना गया. जानकारों ने कहा कि स्कीम के दौरान हवा के कम बहाव, कम नमी और स्कीम के दौरान खराब वाहनों के चलन में आने की वजह से प्रदूषण के स्तर पर असर नहीं पड़ा.

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2016 में ऑड-ईवन स्कीम फेल रहा था


ऑड-ईवन स्कीम से बस कुछ खतरनाक केमिकल्स में आई कमी

हालांकि इस डाटा के साथ ही स्टडी में ये भी बताया गया कि कुछ प्रदूषणकारी तत्वों में इस दौरान कमी भी आई. लेकिन वातावरण में बदलाव की वजह से ज्यादा सकारात्मक नतीजे दर्ज नहीं हो पाए. स्कीम लागू होने के दौरान हवा में मिले कुछ खतरनाक केमिकल्स में कमी आई. इस दौरान हवा में आर्सेनिक, कॉपर, लेड, फॉस्फोरस, मैग्नेशियम, पोटैशियम, क्रोमियम, सिलिका, कैलशियम, सोडियम, क्लोरिन, क्रोमियम और आयरन की मात्रा में कमी आई. इन केमिकल्स का हवा में मिला होना, इंसानों के साथ जानवरों के शरीर के लिए भी घातक होता है.

दिल्ली के प्रदूषण में सबसे ज्यादा पीएम 2.5 और ब्लैक कार्बन का हाथ होता है. ये काफी हलके प्रदूषणकारी तत्व होते हैं, जो हवा में काफी लंबे वक्त तक रहते हैं. सांस के जरिए ये हमारे फेफड़े में चले जाते हैं. इसकी वजह से कई घातक बीमारियों का खतरा बना रहता है. ब्लैक कार्बन ज्यादातर डीजल इंजन की वजह से हवा में मिलता है. ये भी काफी प्रदूषण फैलाता है.

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)