निर्भया फंड: मुआवजे की राशि के वितरण और प्रबंधन को लेकर ठोस नीति का अभाव?

निर्भया फंड: मुआवजे की राशि के वितरण और प्रबंधन को लेकर ठोस नीति का अभाव?
नई दिल्ली. देश में बलात्कार (Rape) की घटनाओं में कमी आने का नाम नहीं ले रहा है. हैदराबाद (Hyderabad) में 26 वर्षीय महिला चिकित्सक से रेप और जलाकर हत्या के बाद महिलाओं की सुरक्षा में खर्च की जाने वाली राशि और सुरक्षा के प्रबंधों की समीक्षा शुरू हो गई है. लोकसभा (Lok Sabha) में सरकार ने बताया है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) के तहत महिलाओं की सुरक्षा के लिए दी जाने वाली राशि का पांच राज्यों ने एक पैसा भी खर्च नहीं किया है. महिला एंव बाल विकास मंत्रालय के नवंबर 2019 के आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश को दी गई राशि का 91 प्रतिशत हिस्सा खर्च नहीं किया गया. निर्भया फंड के तहत केंद्र ने राज्यों को 1,672 करो़ड़ रुपये का फंड दिया था, जिसमें कुल 147 करोड़ रुपये ही खर्च किए गये हैं.

निर्भया फंड के इस्तेमाल को लेकर मचा है घमासान

पिछले छह वर्षों में आम बजट में निर्भया फंड में 3 हजार 600 करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं, लेकिन फंड का सिर्फ 20 प्रतिशत ही इस्तेमाल हो पाया? हालांकि, निर्भया फंड को 2013 में स्थापित किया गया था, लेकिन इसकी गति 2015 से ही बढ़ी. शुरुआती एक-दो सालों में फंड का इस्तेमाल न के बराबर ही हुआ. जिन प्रमुख योजनाओं के तहत राज्यों को धन आवंटित किया गया है, उनमें इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम, सेंट्रल विक्टिम कॉम्पेंसेशन फंड, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम, वन स्टॉप स्कीम, महिला पुलिस वालंटियर और महिला हेल्पलाइन योजना का सार्व भौमिकरण शामिल हैं.

पिछले छह वर्षों में आम बजट में निर्भया फंड में 3 हजार 600 करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं.
बीते सोमवार को ही निर्भया फंड के इस्तेमाल को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र सरकार, केंद्रशासित प्रदेशों और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया था. एनएचआरसी ने महिलाओं के साथ हो रही घटनाओं के निपटने के मानक और तौर-तरीकों के साथ निर्भया फंड के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी मांगी थी. एनएचआरसी ने यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट पर खुद संज्ञान लिया था.

सरकार पैसे को पीड़ितों तक नहीं पहुंचा पाई

केंद्र सरकार ने भले ही ये पैसा आवंटित कर दिए हों, लेकिन सरकार इस पैसे को पीड़ितों तक नहीं पहुंचा पाई. पहले इस फंड का नोडल एजेंसी गृह मंत्रालय हुआ करती थी, लेकिन बाद में गृह मंत्रालय द्वारा इस फंड के लिए आवंटित धन का एक फीसदी भी पीड़ितों तक नहीं पहुंचने पर साल 2015 में मोदी सरकार ने इस मंत्रालय की जगह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को नोडल एजेंसी बना दिया. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को नोडल एजेंसी बनाने के बाद भी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों ने साल 2015 और 2018 के बीच महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया फंड के तहत आवंटित बजट का 20% से भी कम उपयोग किया है.
निर्भया फंड के तहत आवंटित बजट का 20% से भी कम उपयोग किया है.


2015 से 2019 के जून महीने तक 1 हजार 813 करोड़ रुपए कुल राशि बांटी गई है. साल 2018 तक तो सिर्फ 854 करोड़ 66 लाख रुपए ही आवंटित की गई थी. इस फंड के जरिए पूरे देश में रेप पीड़ितों के लिए 600 से अधिक सेंटर बने थे, जहां पर पीड़िताओं को कानूनी और आर्थिक मदद मुहैया कराई जाने की बात कही गई थी. केंद्र सरकार ने उस समय साफ कहा था कि पीड़िता की पहचान छुपे रहेंगे और उसको कानूनी मदद सरकार की तरफ से दी जाएगी. इस फंड से सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगने की बात कही गई थी.

क्यों फंड का इस्तेमाल ठीक से नहीं हो रहा है?

दरअसल निर्भया फंड में पीड़िताओं के मुआवजे की राशि के वितरण और प्रबंधन को लेकर ठोस नीति का अभाव है. सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना है कि इस फंड से तीन मंत्रालय गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और महिला एवं विकास मंत्रालय जुड़े हैं. इसलिए भ्रम की स्थिति है कि किसे क्या करना है. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि केंद्र सरकार इस फंड में धन मुहैया तो करा रही है, लेकिन राज्य सरकारों को यौन हिंसा संबंधी मुआवजा कब और किस चरण में देना है इसे लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है.

पूरे देश में निर्भया कांड के बाद बवाल मचा था


देश के कई राज्यों ने जहां चार से पांच प्रतिशत ही निर्भया फंड की राशि के खर्च किया है, वहीं कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस राशि का एक भी पैसा खर्च नहीं किया है. इनमें बिहार, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पांडिचेरी शामिल हैं. केंद्र सरकार ने निर्भया फंड के तहत महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, दमन- द्वीप को 183 करो़ड़ रुपये का फंड दिया था, लेकिन इन राज्यों ने रकम को खर्च तक नहीं किया. अकेले महाराष्ट्र को केंद्र ने 130 करोड़ रुपये दिए थे. तेलंगाना में जहां 26 वर्षीय वेटनरी डॉक्टर की रेप के बाद जलाकर हत्या की गई है, वहां पर सरकार ने निर्भया फंड के तहत 103 करोड़ रुपये दिए थे. जिसमें वहां केवल 4.19 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो फंड की मात्र 4 प्रतिशत राशि है.

कुछ राज्यों ने तो फंड का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया

निर्भया फंड के तहत विभिन्न योजनाओं में धन के उपयोग के मामले में शीर्ष पांच राज्यों में चंडीगढ़ (59.83%), मिजोरम (56.32%), उत्तराखंड (51.68%), आंध्र प्रदेश (43.63%) और नागालैंड (38.17%) हैं. सबसे खराब पांच राज्यों में मणिपुर, महाराष्ट्र, लक्षद्वीप शामिल हैं, जिसमें एक पैसा भी खर्च नहीं हुआ है. इसके बाद पश्चिम बंगाल (0.76%) और दिल्ली (0.84%) का नंबर आता है.

रेप की घटनाओं पर लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं


साल 2012 में निर्भया गैंगरेप कांड (2012 Delhi Gang Rape) के बाद बनी निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) का मामला एक बार फिर से तूल पकड़ रहा है. साल 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप कांड के बाद साल 2013-14 के आम बजट में निर्भया फंड की घोषणा हुई थी. निर्भया रेपकांड और हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. इस घटना के बाद ही केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष फंड की घोषणा की थी. इस फंड का नाम 'निर्भया फंड' रखा गया था.

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)