ममता को उपचुनावों में मिली आसान जीत,लेकिन चुनाव से पहले इस खतरे ने बढ़ाई चिंता

ममता को उपचुनावों में मिली आसान जीत,लेकिन चुनाव से पहले इस खतरे ने बढ़ाई चिंता
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में नवंबर में हुए विधानसभा उपचुनाव (West Bengal Assembly elections 2021) में सभी तीनों सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Conress) ने बीजेपी समेत दूसरी सभी पार्टियों का सफाया कर दिया. इसी जीत का परिणाम है कि 2021 में बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल और ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को अपनी राह आसान नजर आने लगी है. 2021 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को लगभग 30 फीसदी हिंदू वोटों की जरूरत है, जो भाजपा (BJP) की ओर बढ़ रहा है. कांग्रेस और लेफ्ट का ये वोट बैंक भी बीजेपी की ओर जा रहा है. 2016 में हुए विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में बीजेपी का वोट प्रतिशत 10.2 फीसदी था. 2019 में ये बढ़कर 40.3 प्रतिशत हो गया. 30.1 प्रतिशत वोट में बढ़ोतरी मुख्य रूप से हिंदू वोटर्स के बीजेपी की ओर से आने के कारण हुई. पिछले तीन सालों में बंगाल में बीजेपी धर्म आधारित राजनीति करने में सफल रही है. इसका उसे बढ़े हुए वोट शेयर में फायदा भी हुआ है.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2011 से 2016 के बीच लेफ्ट फ्रंट ने अपना बड़ा वोट शेयर गंवाया है. इस दौरान उसके वोट प्रतिशत में 9.88 प्रतिशत की कमी आई है. वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2019 में करीब लेफ्ट के 16 फीसदी वोट कम हुए हैं. वहीं कांग्रेस के वोट शेयर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 2011 विधानसभा चुनावों में जहां कांग्रेस के पास 8.91 फीसदी वोट थे तो 2016 में बढ़कर ये 12.3 प्रतिशत तक जा पहुंचे. इस चुनाव में कांग्रेस ने वामदलों से गठबंधन किया था. हालांकि 2014 के लोकसभा चुनावों में उसे कम वोट मिले. 2014 में उसे सिर्फ 9.6 प्रतिशत वोट मिले. 2019 के लोकसभा चुनावों में कम होकर ये आंकड़ा 5 प्रतिशत पर आ गया.

TMC का दावा हमारे वोट हर बार बढ़े
टीएमसी नेता और रिटायर्ड कर्नल दीप्तांशु चौधरी का कहना है, 'बीजेपी को जो भी वोट मिले हैं, वह लेफ्ट और कांग्रेस के हैं. हमारा वोट प्रतिशत हर चुनाव में बढ़ा है. बीजेपी हमारे वोट में सेंध नहीं लगा पाई है. 2011 में टीएमसी का वोट प्रतिशत 39 प्रतिशत था, जो 2016 में बढ़कर 39.56 हो गया. 2014 के लोकसभा चुनाव में हमारा वोट शेयर 39.03 प्रतिशत था जो 2019 में बढ़कर 43.3 हो गया. इसका ये अर्थ ये हुआ कि हमारे वोट प्रतिशत में किसी तरह की कमी नहीं आई है. सिर्फ लेफ्ट और कांग्रेस का वोट बीजेपी के साथ गया है.'हिंदू वोटर्स को लुभाने की कोशिश में ममता
इस समय टीएमसी की सबसे बड़ी चिंता बीजेपी को मिले 30 प्रतिशत हिंदु वोटों को अपनी ओर लाने की है. ममता बनर्जी के लिए अगले चुनाव से पहले हालात करो या मरो जैसे हैं, क्योंकि मुस्लिमों के सबसे बड़े चेहरे के रूप में उभर रहे असदुद्दीन ओवैसी बंगाल चुनाव में उतरने की घोषणा कर चुके हैं. उनके आने से ममता बनर्जी को मिलने वाले मुस्लिम वोट में सेंध लग सकती है. पश्चिम बंगाल में 31 फीसदी मुस्लिम वोटर्स हैं. राज्य की राजनीति में किसी भी पार्टी के लिए ये वोटर सबसे अहम रहे हैं. 2011 में ममता बनर्जी के सत्ता में आने से पहले ये लेफ्ट की सत्ता का आधार रहे थे. ममता बनर्जी ये बात अच्छी तरह जानती हैं कि मुस्लिम वोट बैंक में किसी भी तरह का विभाजन 2021 के उनके सपने को तोड़ सकता है. राज्य की 294 विधानसभा सीटों में 90 सीटें ऐसी हैं जहां पर मुस्लिम वोटर्स निर्णायक भूमिका में हैं. ऐसे में ममता बनर्जी इस वोट बैंक को किसी भी कीमत पर बंटने नहीं देंगी.

बीजेपी ने कहा ममता के खिलाफ लोगों में गुस्सा
बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा का कहना है कि ये सही है कि ममता बनर्जी हिंदू वोटर्स को लुभाने की कोशिशों में लगी हैं. लेकिन वह इसमें कभी कामयाब नहीं होंगी. क्योंकि मुस्लिम तुष्टिकरण की रणनीति को रोकना उनके लिए मुश्किल होगा. अगर मुस्लिम वोट बंटा तो समझिए बंगाल में तृणमूल खत्म हो जाएगी. आपने ध्यान दिया होगा कि हिंदुओं को लुभाने के लिए अपनी रैलियों में अब ममता बनर्जी श्लोक बोलती हैं. दुर्गा और काली की स्तुति का अपने भाषण के दौरान इस्तेमाल करती हैं. लेकिन उनका ये दांव अब हमारे वोटर्स पर काम नहीं करेगा. क्योंकि वह ममता बनर्जी के मुस्लिम तुष्टीकरण से गुस्से में हैं.

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)