मामल्लपुरम या महाबलीपुरम, कौन सा नाम सही है?

मामल्लपुरम या महाबलीपुरम, कौन सा नाम सही है?
तमिलनाडु (Tamilnadu) के शहर महाबलीपुरम (Mahabalipuram) में चीन (China) के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) और प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) की मुलाकात होने वाली है. इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है. कश्मीर मसले पर चीन की तरफ से आए कुछ बयान की वजह से दोनों देशों के रिश्ते थोड़े असहज भी हुए हैं. लेकिन कहा जा रहा है कि दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकात के बाद बहुत कुछ साफ हो जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात के लिए बहुत सोचसमझकर महाबलीपुरम को चुना है. तमिलानाडु के इस शहर से चीन का गहरा जुड़ाव रहा है. तमिलनाडु के शहर महाबलीपुरम और चीन के रिश्ते का करीब 1700 साल पुराना इतिहास है.

महाबलीपुरम या मामल्लपुरम ?

महाबलीपुरम का एक और नाम मामल्लपुरम भी है. ये चेन्नई से 56 किलोमीटर दक्षिण में बसा तटीय इलाका है. विदेश मंत्रालय के मीडिया एडवाइजरी में दोनों नेताओं के मुलाकात के शहर का नाम महाबलीपुरम लिखा गया है. सरकारी अधिकारी अनौपचारिक बातचीत में महाबलीपुरम का नाम लेते हैं. लेकिन अभी भी इस शहर को मामल्लपुरम के तौर पर जाना जाता है.सरकारी दस्तावेजों में भी मामल्लपुरम नाम का जिक्र मिलता है. सवाल है कि इस शहर का नाम मामल्लपुरम या महाबलीपुरम कैसे पड़ा? इनदोनों नामों से कौन सा नाम ज्यादा पुराना है और इन नामों का इस शहर के साथ क्या जुड़ाव है?

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महाबलीपुरम में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात होनी है


कैसे पड़ा मामल्लपुरम नाम ?
इतिहासकार बताते हैं कि वास्तविक तौर पर इस शहर का नाम मामल्लपुरम है. हालांकि लोग इसे महाबलीपुरम के नाम से भी पुकारते हैं. दोनों नामों की अपनी-अपनी कहानियां हैं. मामल्लन का अर्थ होता है महान पहलवान. कहा जाता है कि इस शहर को सातवीं सदी के पल्लव वंश के राजा ने बसाया था. पल्लव वंश के राजा नरसिंहदेव बर्मन के नाम पर इस शहर का नाम पड़ा है. इतिहासकार बताते हैं कि नरसिंहदेव बर्मन को लोग मामल्लन के नाम से भी जानते थे. उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम मामल्लपुरम पड़ा.

पल्लव वंश के नरसिंह बर्मन ने इस इलाके में 630 से लेकर 668 ईस्वी तक शासन किया था. इस इलाके में अपनी स्थापत्य कला के लिए मशहूर मंदिरों का निर्माण उनके ही शासन में हुआ था. ये इलाका इन मंदिरों के लिए चर्चित रहा है. अपनी इसी पहचान के चलते इलाके का नाम मामल्लपुरम पड़ा.

महाबलीपुरम नाम कहां से आया ?

इतिहासकार बताते हैं कि महाबलीपुरम का नाम इस इलाके का काफी बाद में पड़ा. यहां 14वीं से 17वीं शताब्दी के बीच विजयनगर का शासनकाल रहा है. इसी दौरान मामल्लपुरम का नाम महाबलीपुरम पड़ा. महाबली एक असुर राजा था. हालांकि इतिहासकार उस असुर राजा महाबली का इस इलाके के साथ कोई सीधा संबंध नहीं बताते हैं.

महाबलीपुरम नाम से यहां के एक मंदिर का अप्रत्यक्ष तौर पर संबंध मिलता है. यहां मशहूर वराह मंदिर गुफाएं हैं. इन गुफाओं में त्रिविकर्मा की प्रतिमाएं उकेरी गई है. त्रिविकर्मा को वामन का विशालकाय रूप बताया जाता है. वामन भगवान विष्णु के पांचवे अवतार हैं. कहा जाता है कि त्रिविकर्मा ने असुर राजा महाबली को मौत के घाट उतारा था. ये एक पौराणिक कथा है, जिसके आधार पर इस इलाके का नाम महाबलीपुरम पड़ने की चर्चा की जाती है.

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महाबलीपुरम अपने प्राचीन मंदिरों के लिए मशहूर है


कौन नाम सही महाबलीपुरम या मामल्लपुरम ?

दोनों ही नाम इसी इलाके के हैं. मामल्लपुरम ज्यादा प्राचीन नाम है जबकि महाबलीपुरम बाद में पड़ा नाम. आजादी के बाद इस इलाके में द्रविड़ राजनीति ने तेजी पकड़ी. इसी के चलते इस इलाके के प्राचीन नाम को फिर से अपनाने का आंदोलन चला.

1957 के सरकारी दस्तावेज में इलाके का नाम मामल्लपुरम लिखा गया. इतिहासकार बताते हैं कि पौराणिक कथा वाले राजा महाबली की बजाय तमिल राजा मामल्लन को प्रमुखता दी गई. जोर दिया गया कि इस इलाके के नाम के तौर पर मामल्लपुरम प्रचलित हो.

इस इलाके को पल्लव वंश के राजाओं ने बसाया था. यहां जितने प्राचीन मंदिर मिलते हैं. सब उन्हीं के शासन काल के हैं. 600 ईस्वी से लेकर 728 ईस्वी तक इस इलाके के मशहूर मंदिरों का निर्माण होता रहा. आज भी यही मंदिर इस इलाके की पहचान हैं और इसी के चलते लोग इसे मामल्लपुरम कहना ही पसंद करते हैं.

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)