जानें कौन हैं वो ​तीन दिग्गज, जिन्हें मिला चिकित्सा में इस साल का नोबेल प्राइज

जानें कौन हैं वो ​तीन दिग्गज, जिन्हें मिला चिकित्सा में इस साल का नोबेल प्राइज
इस साल के नोबेल पुरस्कारों (Nobel Awards) की घोषणा का सिलसिला शुरू हो गया है और सबसे पहले चिकित्सा विज्ञान (Medicine & Physiology) के क्षेत्र में विजेताओं के नामों की घोषणा हुई है. विलियम जी कीलिन (William G. Kaelin), सर पीटर जे रैटक्लिफ (Peter J. Ratcliffe) और ग्रेग एल सेमेंज़ा (Gregg L. Semenza) को संयुक्त रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में इस साल का नोबेल विजेता घोषित किया गया है. कोशिकाएं कैसे ऑक्सीज़न की उपलब्धता को सेंस और एडैप्ट यानी महसूस और अनुकूलन करती हैं, इन तीनों ने संयुक्त रूप से इस क्षेत्र में अहम खोजें की थीं.

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स्वीडन (Sweden) में नोबेल सभा (Nobel Assembly) ने इन तीनों विजेताओं का नाम जारी करते हुए कहा कि जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण अनुकूलन प्रक्रियाओं को समझने की दिशा में खुलासे करने वाले इस बार के विजेता हैं. नोबेल एसेंबली ने यह घोषणा करते हुए ये भी कहा कि विजेताओं को करीब साढ़े छह करोड़ रुपये की राशि यानी 90 लाख स्वीडिश क्राउन (Nobel Prize Money) प्रदान किए जाएंगे. जानें कौन हैं ये तीन विजेता, जिन्हें इस साल के पहले नोबेल विजेता होने का गौरव हासिल हुआ है.

जैसे तैसे अपनी लैब बनाकर लगातार ​की रिसर्चकीलिन ने गणित और केमिस्ट्री में ड्यूक यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री लेने के बाद 1982 में एमडी की डिग्री हासिल की. इसके ​बाद वह डैना फैर्बर कैंसर इंस्टिट्यूट में रिसर्च से जुड़े रहे. उन्होंने डेविड लिविंग्स्टन की प्रयोगशाला में रेटिनोब्लास्टॉमा विषय में रिसर्च में कामयाबी हासिल की. 1992 में अपनी खुद की लैब बनाई और वहां कैंसर की आनुवांशिकी से जुड़े विषयों पर रिसर्च करते रहे. 2002 में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर भी रहे. अमेरिकन कैंसर सोसायटी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान और डॉरिस ड्यूक चैरिटेबल जैसी नामी संस्थाओं ने उनकी रिसर्च के लिए फंडिंग की और उन्हें कई सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है.

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विलियम जी कीलिन, सर पीटर जे रैटक्लिफ और ग्रेग एल सेमेंज़ा को संयुक्त रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में 2019 का नोबेल विजेता घोषित किया गया.
नाइटहुड के पांच साल बाद नोबेल
सर पीटर रैटक्लिफ आण्विक जीवविज्ञानी के तौर पर पहचाने और नवाज़े जा चुके हैं. हायपॉक्सिया से जुड़ी महत्वपूर्ण रिसर्च के लिए उन्हें जाना जाता रहा है और इसी के कारण उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है. ऑक्सफोर्ड में अपने अस्पताल और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ही वह प्रोफेसर के तौर पर काम, इलाज और रिसर्च करते रहे हैं. 2016 से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के टारगेट डिस्कवरी इंस्टिट्यूट के निदेशक रहे हैं. चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतरीन उपलब्धियों के कारण 2014 में उन्हें ब्रिटेन ने 'सर' की उपाधि यानी नाइटहुड से सम्मानित किया था.

HIF-1 के खोजकर्ता हैं सेमेंज़ा
संयुक्त नोबेल पाने वाले तीसरे चिकित्साशास्त्री सेमेंज़ा जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल में रेडिएशन, ऑंकोलॉजी, बायो​लॉजिकल केमिस्ट्री, दवाइयों जैसे कई विषयों के प्रोफेसर रहे हैं. बेसिक मेडिकल रिसर्च के लिए 2016 में उन्हें प्रतिष्ठित लैस्कर अवॉर्ड भी दिया गया था. हायपॉक्सिया इन्ड्यूसेबेल फैक्टर यानी एचआईएफ1 की खोज के लिए उन्हें जाना जाता है, यह अस्ल में वो प्रणाली है जो कैंसर कोशिकाओं को कम ऑक्सीज़न वाली जगहों के अनुकूल होने से जुड़ी है.

क्या है हायपॉक्सिया?
तीनों ही चिकित्सा शास्त्रियों को हायपॉक्सिया से जुड़े महत्वपूर्ण शोध और खोज के लिए नोबेल दिए जाने का फैसला किया गया है. जब शरीर में उतक यानी टिशू स्तर पर पर्याप्त ऑक्सीज़न नहीं पहुंच पाती है, तो शरीर या शरीर के उस खास अंंग की ऐसी स्थिति को हायपॉक्सिया स्थिति कहते हैं. यह स्थिति समय से पहले जन्मे नवजातों में बहुत सामान्य तौर पर देखी जाती है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान शिशु के फेफड़े बाद में विकसित होते हैं. इसके लिए नवजातों को हॉयपॉक्सिया का शिकार मानकर इन्क्यूबेटर में रखकर इलाज किया जाता है. इसी स्थिति में कोशिकाएं कैसे ऑक्सीज़न को सेंस और एडैप्ट करती हैं, इस विषय पर अहम खोजें इन तीनों वैज्ञानिकों ने की हैं.

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)