मौलाना अरशद मदनी के बाद JUH के महमूद मदनी भी संघ से बातचीत को तैयार

मौलाना अरशद मदनी के बाद JUH के महमूद मदनी भी संघ से बातचीत को तैयार
इरम आगा
नई‍ दिल्‍ली. जमीयत-उलेमा-ए-हिंद (ए) (JUH-A) के मुखिया मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madni) ने दो हफ्ते पहले राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) से मुलाकात की थी. जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के महासचिव महमूद मदनी (Mahmood Madni) ने उनके इस कदम का स्‍वागत करते हुए कहा है कि संघ मुस्लिमों को लेकर उदारता दिखा रहा है. महमूद मदनी ने News18 को दिए Interview में कहा कि दोनों समुदायों के बीच की खाई पटाने के लिए लगातार संवाद बहुत जरूरी है.

'संवाद की प्रक्रिया रुकनी नहीं चाहिए, बातचीत के दरवाजे खुले रहें'
महमूद मदनी ने कहा कि मुद्दे हमेशा एक जैसे नहीं रहते हैं. जब हालात में बदलाव आता है तो लोगों की सोच भी बदलती है. मुझे लगता है कि संघ ने ऐसी उदारता दिखाने में काफी देर कर दी. फिर भी यह सुनहरा मौका है और सभी को आपसी बातचीत को प्रोत्‍साहित करना चाहिए. संवाद की प्रक्रिया रुकनी नहीं चाहिए. उन्‍होंने कहा कि युद्ध कर रहे दो देश भी बातचीत सो इनकार नहीं करते हैं. लिहाजा बातचीत के रास्‍ते हमेशा खुले रहने चाहिए.'जरूरत पड़ने पर संघ प्रमुख से बात करने में मुझे एतराज नहीं'
जेयूएच के महासचिव ने कहा, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने खुद कहा कि मुस्लिमों के बिना हिंदुत्‍व अधूरा है. यह कहकर उन्‍होंने कई कदम आगे बढ़ा दिए हैं. अब अगर लगातार बातचीत होती रहे तो बाकी के अच्‍छे बदलाव आसान हो जाएंगे. हमें आपसी मतभेद कम करने के लिए इसकी बहुत जरूरत है. मैं अब तक भागवत से नहीं मिला हूं. उनसे 2007 में जेयूएच से अलग होकर बनी जमीयत-उलेमा-ए-हिंद (ए) के मुखिया मौलाना अरशद मदनी की मुलाकात हुई है. अगर जरूरत होगी तो मुझे उनसे बातचीत करने में कोई एतराज नहीं है.

महमूद मदनी ने कहा कि अगर दोनों समुदायों के बीच लगातार बातचीत होती रहे तो बाकी के अच्‍छे बदलाव आसान हो जाएंगे. हमें आपसी मतभेद कम करने के लिए इसकी बहुत जरूरत है.
'इतिहास के पन्‍ने पलटने से विवाद ही बढ़ेगा, जो कोई नहीं चाहता'
दक्षिणपंथी शिक्षाविदों ने 11 सितंबर को मुगल शासक दाराशिकोह पर एक परिचर्चा आयोजित की थी. इसमें आरएसएस नेताओं ने दाराशिकोह को औरंगजेब से बेहतर बताया था. महमूद मदनी ने कहा कि अगर दारा संघ के लिए अच्‍छा मुसलमान था तो मुझे एमएस गोलवलकर और वीडी सावरकर की कहानियों पर बात करनी होगी. मैं भी पूछ सकता हूं कि नेहरू-पटेल या गोलवलकर-सावरकर में अच्‍छा हिंदू कौन था. मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि इतिहास की परतें उधेड़ने से विवाद बढ़ेगा, जो आज कोई भी नहीं चाहता.

'कलाम को सभी समुदायों के सामने रोल मॉडल की तरह पेश करें'
जेयूएच के महासचिव ने कहा कि हमें इतिहास के बजाय आज पर ध्‍यान देना चाहिए. हमें आज के अच्‍छे हिंदू और मुसलमानों पर बात करनी चाहिए. हालिया अतीत में एपीजे अब्‍दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) का दौर था. अगर वह अच्‍छे मुसलमान हैं तो उन्‍हें सभी समुदायों के सामने रोल मॉडल की तरह पेश किया जाना चाहिए. हम दाराशिकोह के दौर की ओर क्‍यों जा रहे हैं? अच्‍छा या बुरा, औरंगजेब सिर्फ एक शासक था. मैं उसे सिर्फ शासक के तौर पर देखता हूं. औरंगजेब या छत्रपति शिवाजी में कौन ज्‍यादा अच्‍छा था.

'बेहतर माहौल में अपनी मेहनत से खुद आगे बढ़ जाएंगे मुस्लिम'
महमूद मदनी ने कहा कि अगर एक शासक के तौर पर मैं औरंगजेब को 10 में 8 अंक दूंगा तो छत्रपति शिवाजी को 10 में 10 अंक दूंगा. मेरे लिए छत्रपति शिवाजी ऐसे शासक थे जिन्‍होंने किसी भी तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया था. मुस्लिमों के हालात बेहतर बनाने के उपाय पर उन्‍होंने कहा कि अगर देश में शांति का माहौल रहेगा तो वे अपनी मेहनत के दम पर खुद आगे बढ़ने में सक्षम हैं. उनके विकास के लिए देश में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है.

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)