जम्मू कश्मीर: बर्फीली हवाओं की चपेट में आए थे 8 जवान, अब तक केवल एक बचाए जा सके

जम्मू कश्मीर: बर्फीली हवाओं की चपेट में आए थे 8 जवान, अब तक केवल एक बचाए जा सके

श्रीनगर: कश्मीर घाटी के दो सीमवर्ती जिलों में नियंत्रण रेखा से सटे इलाके में मंगलवार को हिमस्खलन होने आठ जवान बर्फ में दब गए थे. तत्काल चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक केवल एक जवान को बचाया जा सका है. इस प्राकृतिक आपदा में चार जवानों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, बाकी के तीन की तलाश जारी है. एक हिमस्खलन कुपवाड़ा के तंगधार सेक्टर के इगल पोस्ट के करीब हुआ. इसकी चपेट में सेना के चार जवान आए जो पोस्ट के बाहर नियंत्रण रेखा को गार्ड कर रहे थे. 

तुरंत इस इलाक़े में रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया और रात भर यह अभियान चला, मगर करीब 10 फीट बर्फ जमने के चलते फंसे हुए जवानों को बाहर निकालने में काफी मुश्किल हुई. बताया जा रहा है कि इन इलाकों में तापमान माइनस 15 डिग्री तक पहुंच चुका है. इसके बावजूद एक जवान को यहां जिंदा बचा लिया गया है. अब तक के रेस्क्यू में तीन जवानों के शव ढूंढे जा सके हैं. यहां रेस्क्यू अभियान करीब 24 घंटों तक चला और सेना और द्रुत एक्शन टीम ने पूरी कोशिश की कि सैनिकों की जान बचायी जा सके.

वहीं दूसरा हिमस्खलन जिला बंदीपोर के नियंत्रण रेखा के पास गुरेज सेक्टर के दावर इलाके में हवा, जिसमें में एक सेना का गश्ती दल बर्फीला तूफान आ गया. यहां भी बताया जा रहा है कि कितने सेना के जवान बर्फ के नीचे दब गए इसका पूरा पता नहीं है. इन्हें निकालने के लिए भी रेस्क्यू अभियान घंटों तक चलाया गया, मगर अब तक सेना के अनुसार एक ही शव बरामद हुआ है. इलाके में अभियान अब भी जारी है, ताकि अगर कोई सेना का जवान बर्फ के नीचे दबा हो तो उसे भी रेस्क्यू किया जाए. सेना के सूत्रों के मुताबिक़ यहां अब भी 3 जवान लापता हैं. 

सेना के एक बयान के मुताबिक बचाव और चिकित्सा टीमों के बेहतरीन प्रयासों के बावजूद तंगधार सेक्टर में तीन सैन्यकर्मी और गुरेज सेक्टर में सेना के एक जवान ने दम तोड़ दिया है. बताया जा रहा है कि जिन जवानों को बर्फ से निकला गया था, उन्हें ह्यपोथेरमिया हो गया था.

पिछले एक महीने में मौसम के कहर की यह तीसरी घटना है, जहां सेना के जवानों और नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी. पहले दो अलग-अलग घटनाओं में लद्दाख़ के सियाचिन ग्लेशियर जो दुनिया का सब से ऊंची रणभूमि हेम में हिमस्खलन की चपेट में आने पर छह सैनिकों और दो सेना के पोटेरों की जान चली गई थी. 

18 नवंबर को 19000 फीट ऊंचे उतरी सियाचिन ग्लेशियर में एक हिमस्खलन में 4 सेना के जवाओं और सेना के 2 पोटरों की मौत हो गई थी. वहीं 30 नवंबर को लगभग 18,000 फीट पर दक्षिणी सियाचिन ग्लेशियर पर हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद सेना के एक गश्ती दल के हिमस्खलन में आने के बाद दो सैनिकों की मौत हो गई थी.

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from Zee News.)