IRTE ने नए ट्रैफिक फाइन पर उठाए सवाल, कहा- देश में नहीं है इंफ्रास्ट्रक्चर

IRTE ने नए ट्रैफिक फाइन पर उठाए सवाल, कहा- देश में नहीं है इंफ्रास्ट्रक्चर
नई दिल्‍ली. इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (Institute of Road Traffic Education) ने अब नए ट्रैफिक फाइन (Traffic Fine) पर सवाल खड़ा किया है. इंस्टीट्यूट का मानना है कि मोटर व्हीकल ऐक्ट (Motor Vehicle Act) में संशोधन कर जुर्माना बढ़ाने के पीछे की मंशा ठीक है, लेकिन देश में इसे लागू करने के लिये पर्याप्‍त इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) नहीं है. भारत में सरकार के आधिकारिक तौर पर आंकड़े बताते हैं कि सड़क दुर्घटना के कारण प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत होती है. जबकि WHO के मुताबिक यह आंकड़ा लगभग तीन लाख प्रति वर्ष का है, जो कि विश्व में दुर्घटना में होने वाली मौत का 23 फीसदी है.

भारत में सड़क की लंबाई बनाम सड़क दुर्घटना में मौत
आईआरटीई (Institute of Road Traffic Education) के अनुसार ट्रैफिक के जो अधिकांश फाइन होते हैं वे शहरी क्षेत्रों में होते हैं. जबकि सड़क दुर्घटना में अधिकांश मौत राष्ट्रीय और राज्यों के हाईवे में होती है. आईआरटीई के अनुसार राष्ट्रीय और राज्य हाईवे की कुल सड़कों में हिस्सेदारी मात्र 4.9 फीसदी है. जबकि सड़क दुर्घटना में 62.9 फ़ीसदी लोग की मौत इन्हीं हाईवे पर होती है.

नियम तोड़ने पर फाइन, लेकिन सड़कों पर साइन गलतआईआरटीई (Institute of Road Traffic Education) का मानना है कि हमारी सड़कों पर जो ट्रैफिक साइन लगे हैं उनमें से अधिकांश गलत हैं या फिर अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं करते. आईआरटीई के एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली जो कि देश की राजधानी है में 70 से 80 फ़ीसदी तक ट्रैफिक साइन गलत लगे हुए हैं. दिल्ली के अधिकांश सड़कों पर लगे राइट ग्रीन सिग्नल के बंद होने के पहले कभी येलो लाइट नहीं है, जो कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ठीक नहीं है. इसके साथ ही दिल्ली में कम जगहों पर दोपहिया और तिपहिया गाड़ियों की स्पीड की लिमिट को लेकर कोई निर्देश दिया गया है. स्टॉप साइन को माइनर सड़कों पर लगाया गया है जो नियम के अनुसार गलत है. इसके साथ ही कई जगहों पर विभिन्न भ्रामक ट्रैफिक साइन लगे होने की बात भी आईआरटीई ने कही. पटना-गया हाईवे पर सिर्फ एक स्पीड साइन होने की भी बात आईआरटीई ने की.

सड़क भी जिम्मेदार
सड़क दुर्घटना और इसके कारण होने वाली मौत के लिए आईआरटीई ने खराब सड़कों को भी ज़िम्मेदार बताया. आईआरटीई के अनुसार 1 अप्रैल 2018 को नूरपुर में 27 बच्चों की सड़क दुर्घटना में मौत का कारण ड्राइवर नहीं बल्कि ख़राब सड़क थी.
पुलिस की भूमिका
आईआरटीई ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किया. कहा कि उनको बिना किसी ट्रेनिंग के इस काम में लगाया जाता है. साथ ही पुलिस को इसमें कहीं न कहीं जज की भूमिका में लाया गया है.

ये भी पढ़ें: ओला, उबर या अपनी गाड़ी, जानें किसमें चलना है फायदेमंद?

95 साल का होते ही रिटायर हो जाएगा संसद भवन, पार्लियामेंट की नई बिल्डिंग बनाने की तैयारी

(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)