अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्ष के पास बचे हैं अब ये रास्ते, 17 नवंबर को फैसला

अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्ष के पास बचे हैं अब ये रास्ते, 17 नवंबर को फैसला
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने अयोध्या में विवादित ज़मीन (Ayodhya Land Dispute) को लेकर अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जन्मभूमि को रामलला को दी है. वहीं मस्जिद के लिए अलग से जमीन देने के लिए कहा है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दूसरा पक्ष इस फैसले को मानेगा या फिर कोई और कदम उठाएगा.

रिव्यू पेटिशन पर फैसला
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पेटिशन डालने को लेकर आखिरी फैसला 17 नवंबर को करेगा. शनिवार को AIMPLB के वकील जफरयाब जिलानी ने संकेत दिए हैं कि वो एक बार फिर से रिव्यू पेटिशन के साथ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं. अखबार के मुताबिक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कई सदस्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश नहीं है.

AIMPLB का तर्कAIMPLB के सदस्यों को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर कैसे सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला नहीं सुनाया. उनका तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि 1949 में बाबरी मस्जिद के अंदर छुपकर मूर्ति रख दी गई. इसके अलावा कोर्ट ने ये भी माना कि कानून को तोड़ते हुए 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद को ढाहा गया. AIMPLB का ये भी तर्क है कि उन्होंने हिंदुओं को सीता रसोई और चबुतरे पर पूजा करने से कभी मना नहीं किया. इनका ये भी कहना है कि वक्फ बोर्ड के पास ज़मीन की कोई कमी नहीं है बस उन्हें न्याय चाहिए.

क्या था सुप्रीम कोर्ट कै फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पूरी विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक माना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन पर रामलला का दावा मान्य है. इस जमीन पर मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करने के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया गया है. केंद्र सरकार ही ट्रस्ट के सदस्यों का नाम निर्धारित करेगी.
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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)