अगर 'अनौपचारिक' बातचीत में चीन की तरफ से उठा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा?

अगर 'अनौपचारिक' बातचीत में चीन की तरफ से उठा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा?
नई दिल्ली:

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ होने पीएम मोदी की होने वाली 'अनौपचारिक'  मुलाकात के बाद न तो कोई बयान जारी होंगे और न ही किसी समझौते पर हस्ताक्षर होंगे लेकिन यह बैठक काफी अहम है. भारत आने से पहले चीन के राष्ट्रपति की मुलाकात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बुधवार को  हुई थी. जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर में स्थिति पर चीन 'करीबी नजर रखे हुए' है और 'यह बात स्पष्ट' है. साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि 'संबंद्ध पक्ष' शांतिपूर्ण वार्ता के जरिए इस मामले को सुलझा सकते हैं. चीनी राष्ट्रपति ने इमरान खान को बैठक के दौरान भरोसा दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय हालात में बदलावों के बावजूद चीन और पाकिस्तान के बीच मित्रता अटूट तथा चट्टान की तरह मजबूत है. लेकिन चीन के राष्ट्रपति के इस बयान पर भारत ने कड़ा बयान दिया था जिसमें कहा गया कि यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक और संप्रभु मामला है और भारतीय संविधान से जुड़ा हुआ है. किसी भी अन्य देश को इससे कुछ लेना-देना नहीं है.  

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, 'भारत का पक्ष अटल बना हुआ है और स्पष्ट है कि जम्मू एवं कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा है. चीन हमारे पक्ष से अच्छी तरह वाकिफ है. भारत के आंतरिक मामलों पर किसी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है.'  इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 11-12 अक्टूबर को होने वाले शी-मोदी (Xi Jinping- PM Modi) की बातचीत में कश्मीर और अनुच्छेद 370 का मामला शामिल नहीं है और अगर शी मामले में और ज्यादा जानना चाहेंगे तो उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी दी जाएगी.


इसी तरह कुछ महीने पहले फ्रांस में आयोजित जी-20  सम्मेलन में से इतर जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी से मुलाकात होने वाली थी तो उससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर मध्यस्थता का राग अलापा था. उनके इस बयान के बाद यह बैठक काफी अहम हो गई थी लेकिन पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक में साफ कहा था कि जम्मू-कश्मीर पर भारत किसी भी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं चाहता है. साथ ही यह भी कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाना भारत का आंतरिक मामला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान 1947 से पहले साथ थे और उन्हें विश्वास है कि दोनों पड़ोसी अपनी समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान कर सकते हैं. पीएम ने किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की गुंजाइश को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि दोनों देश सभी मुद्दों पर चर्चा कर समाधान कर सकते हैं.

हालांकि महाबलिपुरम में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति के साथ होने वाली बैठक में कश्मीर एजेंडे में नहीं है लेकिन चूंकि यह अनौपचारिक मुलाकात है तो हो सकता है कि सामान्य बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठ जाए. ऐसे में इस बात पर भी नजर रहेगी कि पीएम मोदी ने जिस तरह अमेरिका के राष्ट्रपति को समझा दिया था वैसे ही चीन के राष्ट्रपति को भी जम्मू-कश्मीर के मसले पर अवगत करा देंगे. 

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