कभी नहीं सोचा था कि एक महिला क्रिकेटर पुरुषों के वर्चस्व वाले बोर्ड का हिस्सा बनेगीः शांता रंगास्वामी

कभी नहीं सोचा था कि एक महिला क्रिकेटर पुरुषों के वर्चस्व वाले बोर्ड का हिस्सा बनेगीः शांता रंगास्वामी





खेल डेस्क. भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान शांता रंगास्वामी जल्द ही बीसीसीआई की नौ सदस्यीय शीर्ष परिषद का हिस्सा बनने वाली हैं। भारतीय क्रिकेटर्स एसोसिएशन (ICA) के चुनाव में उनका निर्विरोध चुना जाना तय है। इस बारे में उनका कहना है कि पुरुषों के वर्चस्व वाले बोर्ड में किसी महिला क्रिकेटर के चुने जाने के बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा था।

एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए रंगास्वामी ने कहा, 'मैंने कभी अपने सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं बोर्ड में चुनी जाउंगी। यहां तक कि मैंने वहां किसी पुरुष क्रिकेटर के पहुंचने की कल्पना भी नहीं की थी। कुछ लोग लोढ़ा समिति के सुझावों को कोस रहे होंगे, लेकिन ये सब केवल उसी की वजह से संभव हुआ है। आखिरकार बोर्ड में हमें आवाज मिल ही गई। ये पुरुषों के गढ़ में तूफान आने जैसा है।'

महिला प्रतिनिधित्व को बड़ी बात बताया

देश के क्रिकेट बोर्ड में महिला प्रतिनिधित्व को उन्होंने खेल के लिए एक विशाल छलांग की तरह बताया। वे बीसीसीआई लाइफटाइम अचीवमेंट पाने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी हैं साथ ही उन्हीं की कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने अपनी पहली टेस्ट सीरीज भी जीती थी। रंगास्वामी ने उस दौर में क्रिकेट खेला था, जब महिला क्रिकेट को बीसीसीआई ने मान्यता नहीं दी थी। उन्होंने अपना पहला टेस्ट अक्टूबर 1976 में खेला था।

महिला क्रिकेट के लिए दृष्टिपत्र बनाया

बीसीसीआई की शीर्ष परिषद के गठन के बाद महिला क्रिकेट के विकास के लिए रंगास्वामी अपने पांच सूत्रीय दृष्टिपत्र को आगे बढ़ाएंगी। वे सेवानिवृत्त अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटरों को पूर्व रणजी ट्रॉफी क्रिकेटरों के समान पेंशन दिलवाना चाहती हैं। इसके अलावा वे सेवानिवृत्त घरेलू क्रिकेटरों को भी बीसीसीआई से पेंशन दिलवाना चाहती हैं साथ ही वर्तमान घरेलू खिलाड़ियों की मैच फीस में भी बढ़ोतरी चाहती हैं।

महिला क्रिकेटरों की फीस बढ़ाई जाए

रंगास्वामी ने बताया 'मैं ये नहीं कह रही कि रणजी क्रिकेटर्स को फिलहाल जो पेंशन मिल रही है वो उसके लायक नहीं हैं, बल्कि मैं तो सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय महिला क्रिकेटरों को उनकी बराबरी पर लाना चाहती हूं। और घरेलू क्रिकेटरों को अंडर-19 के लड़कों को जितना भुगतान किया जा रहा है, जो कि बिल्कुल अस्वीकार्य है।' उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि पिछले 15 सालों में महिलाओं के बीच कोचिंग को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ नहीं किया गया।

महिलाओं को सपोर्ट स्टाफ में जगह मिलना चाहिए

पूर्व कप्तान के मुताबिक, 'लेवल-2 की कई महिला कोचों को लेवल-3 में ग्रेजुएशन करने से वंचित कर दिया गया। वे पेशेवर कोचिंग करने में सक्षम नहीं हैं। मैं ये नहीं कह रही कि नामी पुरुष क्रिकेटर को राष्ट्रीय महिला टीम का कोच नहीं होना चाहिए, लेकिन महिलाएँ कम से कम उनके सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा तो हो सकती हैं।'

अंडर-16 टूर्नामेंट की जरूरत बताई

रंगास्वामी का ये भी मानना है कि बीसीसीआई को सीनियर लेवल पर इंटर-जोनल प्रतियोगिताएं कराने की बजाए अखिल भारतीय स्तर पर अंडर-16 टूर्नामेंट का आयोजन कराना चाहिए। उन्होंने कहा, 'आपकी फीडर लाइन (क्रिकेटरों की नई पौध) अंडर-16 टूर्नामेंट्स से ही आएंगी। उनका होना अत्यधिक जरूरी है।'









भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान शांता रंगास्वामी। (फाइल फोटो)






(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from Bhaskar.)