CAB 2019 के विरोध पर बोले हिमंत - पाक की वजह से लाना पड़ रहा बिल,बताई वजह

CAB 2019 के विरोध पर बोले हिमंत - पाक की वजह से लाना पड़ रहा बिल,बताई वजह
नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) 2019 के कैबिनेट से मिली मंजूरी के बाद CNN-News18 रिपोर्ट मारिया शकील ने असम (Assam) सरकार में वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा  (Himanta Biswa Sarma) से बात की. उन्होंने कहा कि ऐसा पाकिस्तान की वजह से करना पड़ रहा है. इस विधेयक पर जारी विरोध प्रदर्शन से जुड़े सवाल पर सरमाने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह से हुई आसू नेताओं की बातचीत के बाद कई भ्रम दूर हुए हैं. उन्होंने कहा कि हमारी बैठक सिर्फ आसू केंद्रित नहीं थीं.

सरमा ने कहा कि बीते तीन महीने में गृह मंत्री ने पूर्वोत्तर के कम से कम 150 संगठनों के 600 लोगों से मुलाकात की. इस मुद्दे पर बात करने के लिए कम से कम 110 घंटे तक उन्होंने चर्चा की.

 हम कुछ संगठनों को समझाने में नाकाम रहे...
सरमा ने कहा कि मैं इस बात को लेकर आश्ववस्त हूं कि बातचीत और चर्चा के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ कोई बड़ा विवाद नहीं होगा. उन्होंने कहा कि हालांकि हम पूरी तरह से विवाद खत्म होने का दावा नहीं कर सकते क्योंकि हम कुछ संगठनों को समझाने में नाकाम रहे हैं. जैसे कांग्रेस, आसू.. हम कई संगठनों के 100 से ज्यादा लोगों को नहीं समझा सके हैं.पूर्वोत्तर में एनडीए के घटक दलों की ओर से इस विधेयक के विरोध से जुड़े सवाल पर सरमा ने कहा कि मुझे लगता है कि गृहमंत्री शाह से नागालैंड के मुख्यमंत्री की बातचीत अच्छी रही. नागालैंड डेलिगेशन बहुत ही खुशी से गया. मिजोरम, मणिपुर,अरुणाचल प्रदेश डेलिगेशन पूरी तरह खुश हैं. ऐसे में हमें नहीं लगता है कि कोई नाराज है या गुस्सा है. सभी ने कुछ ना कुछ सलाह दी है. मेघालय के मुख्यंत्री कनरॉड संगमा ने भी अपना पक्ष रखा है. कुछ मांगों पर ध्यान भी दिया गया है.

'कुछ लोग ऐसे हैं जो CAB चाहते ही नहीं हैं '
सरमा ने कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं जो CAB चाहते ही नहीं हैं और हम चाहते हैं कि ऐसा हो... उनके बीच विरोध है.


विधेयक के मुस्लिम विरोधी होने के सवाल पर सरमा ने कहा कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान इस्लामिक देश हैं और वहां लोग कुरान का पालन करते हैं तो वह भारतीय कानून के तहत कैसे आएंगे. भारत हर तरह के शख्स के लिए अपने दरवाजे नहीं खोल सकता है.' उन्होंने कहा कि 'यदि पाकिस्तान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होता तो भारत को इस विधेयक की आवश्यकता नहीं होती. पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण है कि हमें ऐसा करना पड़ा है.'

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)