एक बच्‍ची नाव लेकर दुनिया बचाने निकली और उसके पीछे हड़ताल पर चले गए लाखों

एक बच्‍ची नाव लेकर दुनिया बचाने निकली और उसके पीछे हड़ताल पर चले गए लाखों
दुनिया में जबसे मनुष्‍य ने होश संभाला है, तभी से वह प्रलय और प्रलय से बचाने वाले इंसान की कल्‍पना करता रहा है. भारत में ऐसी कल्‍पना मनु के रूप में की गई है. मनु वह प्रथम पुरुष हैं जिन्‍होंने जल प्रलय के समय डूबती सभ्‍यता को एक नाव में बैठाकर पार लगाया. इस तरह सभ्‍यता के एक युग के पतन के बाद मनु ने सभ्‍यता के नए युग का सूत्रपात किया. इस नई सभ्‍यता के वंशज मनु की संतान यानी मुनष्‍य कहलाए. मनुष्‍यों की इस नई सभ्‍यता से उम्‍मीद की गई कि वह मानवता का पालन करेगी.

आज 21वीं सदी में एक बार फिर इस कथा को दुहराना पड़ रहा है, क्‍योंकि दुनिया के सामने फिर नए संकट खड़े हो गए हैं. और क्‍या यह संयोग है कि 16 साल की एक लड़की फिर से एक नौका लेकर दुनिया को बचाने निकली है. उसकी अपील का ऐसा असर हुआ है कि आज 20 सितंबर को दुनिया के बहुत से देशों के बच्‍चे क्‍लाइमेट स्‍ट्राइक यानी जलवायु परिवर्तन से दुनिया को बचाने के लिए हड़ताल पर चले गए हैं.

न्‍यूयॉर्क के स्‍कूलों ने अपने यहां के 11 लाख बच्‍चों को आज छुट्टी दे दी है कि वे चाहें तो इस हड़तात में शामिल हो जाएं, हां, वे अपने माता-पिता से इजाजत लेना न भूलें. ऑस्‍ट्रेलिया के मेलबर्न में एक लाख से ज्‍यादा बच्‍चे इस हड़ताल में शामिल होकर सड़कों पर उतर आए हैं. यह आंदोलन लंदन, पेरिस, पर्थ और न्‍यूयॉर्क जैसे शहरों में दिखने लगा है.

भारत में इस आंदोलन की बहुत चर्चा भले ही नहीं हो रही है, लेकिन पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा है कि आखिर 16 साल की ग्रेटा थनबर्ग ने ऐसा क्‍या किया कि संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंटोनियो गुटर्स ने संयुक्‍त राष्‍ट्र क्‍लाइमेट समिट में उसे विशेष वक्‍ता के तौर पर बुलाया है. यहां 23 सितंबर को वह दुनिया के नेताओं को पर्यावरण बचाने के बारे में जागरूक करेगी.दरअसल स्वीडन की रहने वाली ग्रेटा थनबर्ग दुनियाभर में घूमकर क्‍लाइमेट बचाने का संदेश देती रहती हैं. उनके इस अभियान के तहत दुनिया के 139 देशों में अब तक 4368 जगहों पर प्रदर्शन हो चुके हैं. पता नहीं, इससे पहले किसी किशोरी की आवाज पर दुनिया में ऐसी उथलपुथल मची या नहीं.

ग्रेटा के आंदोलन के स्‍वरूप को देखें तो इसमें महात्‍मा गांधी की छाप साफ दिखाई देती है. जैसे उनका साफ कहना है कि हमारे पास कोई प्‍लेनेट-बी यानी दूसरा ग्रह नहीं है, जहां इंसान जाकर बस जाएं, इसलिए हमें हर हाल में धरती को बचाना होगा. उनकी यह बात महात्‍मा गांधी से हुबहू मिलती है.

बापू ने एक सदी पहले लिखी अपनी किताब हिंद स्‍वराज में कहा था कि इंग्‍लैंड जैसे देश को चलाने के लिए पूरी दुनिया का शोषण करना पड़ता है. अगर हमने इंग्‍लैंड की भौतिक सभ्‍यता की नकल की और आजादी के बाद भारत को इसी मॉडल पर आगे बढ़ाया तो हमें शोषण करने के लिए कई धरतियों की जरूरत पड़ेगी. जाहिर है बापू कह रहे थे कि धरती एक ही है और हम इस तरह जिएं कि इसे बचाए रख सकें.
ग्रेटा का नारा ही नहीं तौर तरीका भी खासा गांधीवादी है. संयुक्‍त राष्‍ट्र में भाषण देने के लिए वे इंग्‍लैंड से न्‍यूयॉर्क आने के लिए कोई भी अंतरराष्‍ट्रीय फ्लाइट पकड़कर कुछ घंटे में अपना सफर तय कर सकती थीं. लेकिन उन्‍होंने हवाई जहाज में बैठना नकार दिया.

ग्रेटा का मानना है कि हवाई जहाज प्रदूषण फैलाता है, ऐसे में पर्यावरण बचाने का संदेश देने के लिए वे एक प्रदूषण फैलाने वाले विमान में कैसे बैठ सकती हैं. उन्‍होंने दूसरा तरीका चुना. वे इंग्‍लैंड प्‍लाई माउथ शहर से एक नाव में बैठीं. इस नाव का नाम है मैलिजिया सेकंड.

नाव की खासियत है कि यह बिलकुल प्रदूषण नहीं फैलाती. यह सोलर पावर और पानी के भीतर काम करने वाली टरबाइन से चलती है. मानवता को बचाने का संदेश लेकर इस मानवी की नाव 15 दिन का सफर तय कर इंग्‍लैंड से अमेरिका के न्‍यूयॉर्क पहुंची. उनके यहां पहुंचने के बाद शुक्रवार को दुनिया भर के बच्‍चों ने हड़ताल की. यह हड़ताल का तीसरा चरण है. इससे पहले मार्च में भी ऐसी हड़ताल हो चुकी है. बच्‍चों की इस हड़ताल का आलम यह है कि अब बालिग भी इसमें शामिल हो रहे हैं.

अमेजॉन और माइक्रोसाफ्ट के कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होने की बात कही है. कपड़ों के मशहूर ब्रांड पैटागोना ने कहा है कि वह अपने यहां एक दिन काम बंद रखेगा ताकि उसका स्‍टाफ हड़ताल में शामिल हो सके. यह कैसी विरोधाभासी बात है कि कंपनियां खुद अपने कर्मचारियों को इसलिए छुट्टी दे रही हैं कि वे हड़ताल करें. न्‍यूयार्क के मेयर ने इसलिए स्‍कूलो की छुट्टी कर दी कि बच्‍चे हड़ताल करें.

यही ग्रेटा का गांधीवादी तरीका है, जो हृदय परिवर्तन में यकीन करता है. इसीलिए बच्‍चों की इस हड़ताल को वे मास सिविल डिसओबिडियंस भी कहती हैं. आपको याद आ गया होगा कि सबसे पहले महात्‍मा गांधी ने ही सविनय अवज्ञा यानी सिविल नाफरमानी यानी सिविल डिसओबिडियंस का प्रयोग भारत की आजादी की लड़ाई में किया था.

आज गांधी जी के 150वें जयंती वर्ष में दुनिया भर के बच्‍चे अगर चाहे अनचाहे बापू के नारे के नीचे इकट्ठे होकर दुनिया को बचाने की बात कह रहे हैं, तो हमें उम्‍मीद करनी चाहिए कि हम भी जल्‍द से जल्‍द इस आंदोलन में शरीक हो जाएं.

आज से शुरू हुई बच्‍चों की यह हड़ताल 27 सितंबर को भी कुछ देशों में होगी. इसके पहले 23 सितंबर को ग्रेटा थनबर्ग संयुक्‍त राष्‍ट्र को संबोधित करेंगी. जाहिर है उनका भाषण पृथ्‍वी के भविष्‍य के लिए कोई निर्णायक बात कहेगा. क्‍योंकि वे खरा बोलने वाली बच्‍ची हैं. अपने अ‍भियान में जब वे अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा से मिली थीं तो उन्‍होंने कहा था कि आप लोग इस दुनिया को हम बच्‍चों के लिए छोड़ोगे या नहीं.

जाहिर है 21वीं सदी की यह मानवी फिर से सभ्‍यता को मनु और प्रलय की बिसरी कहानी याद दिला रही है. उसकी प्रदूषण मुक्‍त नौका हमारी सभ्‍यता को एक सुरक्षित भविष्‍य में ले जाने की गारंटी है. अब यह हम सब लोगों पर है कि हम प्रदूषण वाले अपने तौर तरीकों से चिपके रहते हैं, या फिर एक साफ सुथरी प्राकृतिक दुनिया की ओर बढ़ना तय करते हैं, जिसकी मांग दुनिया के लाखों बच्‍चे हड़ताल करके कर रहे हैं.

(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)