मोदी ने जिनपिंग को दिया 108 किग्रा का लैंप, 3 फीट की पेंटिंग, जानें और खासियत

मोदी ने जिनपिंग को दिया 108 किग्रा का लैंप, 3 फीट की पेंटिंग, जानें और खासियत
नई दिल्ली: दो दिन की यात्रा पर भारत पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping)  का चेन्नई में पूरे ठाठ के साथ स्वागत किया गया. यहां पर पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को विशेष बनाते हुए को दो खास गिफ्ट दिए. इनमें एक डांसिंग सरस्वती की तंजावुर पेंटिंग और ब्रांचेड अन्नम लैंप शामिल है. इन दोनों की खूबसूरती और विशेषताएं इन्हें बेशकीमती बनाती है.

ब्रांचेड अन्नम लैंप 108 किग्रा वजनी है तो लकड़ी पर बनी ये खास पेंटिंग तीन फीट ऊंची और चार फीट चौड़ी है. इसके अलावा भी इनकी कई खासियत हैं, जो तमिल वास्तुकला के बेजोड़ नमूने का उदाहरण हैं. आइए जानते हैं इन दोनों गिफ्ट के बारे में जो पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को दीं.



नचियारकोइल-ब्रानचेड अन्नम लैंप
इस लैंप को तमिलनाडु में नचियारकोइल में पातेर नामक समुदाय बनाता है. ये समुदाय नागरकोइल से चलकर पहले कुंभकोनम आया और उसके बाद इस समुदाय ने अपना ठिकाना नचियारकोइल में बनाया. उनके लैंप के लिए उन्हें कावेरी की हल्की ग्रे रंग की बालू भी मिल गई जो उनके लैंप को डालने में काम आती थी.

इस लैंप को आठ सिद्धहस्त शिल्पकारों ने तैयार किया है. इसे कांसे से बनाया गया है, जिस पर सोने की परत चढ़ाई गई है. ये लैंप छह फीट लंबा है. इसका वजन 108 किग्रा है. इसे बनाने में 12 शिल्पियों को 12 ही दिन लगे. इसे पीएम मोदी ने खास तौर पर शी जिनपिंग को देने के लिए बनवाया है. इससे तीन गुना छोटे आकार के लैंप की कीमत तकरीबन 1 लाख रुपए है.

तंजावुर पेंटिंग-डांसिंग सरस्वती
तंजावुर पेंटिंग को 'पलगई पदम'' के नाम से भी जाना जाता है. ये पेंटिंग लकड़ी पर बनाई जाती है. इसे तंजावुर में बनाने के कारण इसे ये नाम मिला. 16वीं और 18वीं सदी से इसका सफर शुरू हुआ और नायक और मराठा राजाओं के शासन काल में इसका काफी विकास हुआ. इसे बहुत पवित्र माना जाता है. इसे राजुस और नायडू समुदाय द्वारा बनाया जाता है.

लकड़ी पर बनाई गई ये पेंटिंग 3 फीट ऊंची, चार फीट चौड़ी और 40 किग्रा भारी है. इसे बनाने में 45 दिन लगे.

(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)