मां की भक्ति और स्वस्थ जीवन का अद्भुत उदाहरण पेश कर रहे ये खास पूजा पंडाल

मां की भक्ति और स्वस्थ जीवन का अद्भुत उदाहरण पेश कर रहे ये खास पूजा पंडाल
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का एक अलग ही रूप देखने को मिलता है. 10 दिन तक मनाए जाने वाले इस उत्सव को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं. कोलकाता के विभिन्न इलाकों में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर अलग अलग थीम पर मां दुर्गा के पूजा पंडाल बनाए जाते हैं. ये पंडाल लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. खास बात यह है कि ये सभी पंडाल मां की भक्ति के साथ साथ यहां आने वाले लोगों को कई महत्वपूर्ण संदेश भी देते हैं जिनमें रेडिएशन से पक्षियों को होने वाले नुकसान, ग्लोबल वॉर्मिंग, महिला
सशक्तिकरण, सोहार्दता जैसे मुद्दे शामिल हैं. आपको बता दें कि लोगों को जागरूक करने का काम ये पंडाल पिछले कई वर्षों से बखूबी निभा रहे हैं. आइए आपको बताते हैं इस बार की दुर्गा पूजा में कोलकाता के कौन से 5 पंडाल ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया और क्यों. जानते हैं इनकी खासियत.

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दमदम पार्क तरुण दल

इस पूजा पंडाल ने अब की बार हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया. इसका मुख्य कारण पंडाल का भव्य साज नहीं बल्कि इसका थीम था. दरअसल इस पंडाल का थीम ट्रांसजेंडरों की जिंदगी पर आधारित था. ट्रांसजेंडरों को इस समाज में कैसे देखा जाता है, उनके साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है यह छवि इस पंडाल में देखने को मिल रही थी. पंडाल की छत पर एक स्क्रीन की व्यवस्था की गई थी जिसमें लोग ट्रांसजेंडरों का नाच गान देख सकते थे. वहीं पंडाल की दीवारों पर कई हाथ बनाएं गए थे जो उनके मुक्त रूप से जीने की गुहार लगा रहे थे. आपको बता दें कि इस पूजा पंडाल के थीम सॉन्ग में भी कोलकाता के कुछ ट्रांसजेंडरों से परफॉर्म कराया गया था.

त्रिधारा

त्रिधारा क्लब ने नारी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए अपने पूजा पंडाल के थीम को महिलाओं के चित्रों के भर दिया था. पूरे पंडाल में विभिन्न महिलाओं की तस्वीरें लगाई गई थीं जिन्होंने अपने क्षेत्र में सफलता हासिल की है और समाज में महिला के दृष्टिकोण को बदल दिया है. पंडाल में 3डी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था जिसके एक तरफ देखने पर मां दुर्गा के विभिन्न रूप नजर आ रहे थे वहीं दूसरी तरफ रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू, मां शारदा जैसी महिलाओं की तस्वीरें नजर आ रही थीं. पूरे पंडाल में लाल रंग का प्रयोग किया था जो कि नारी की शक्ति का रंग है. प्यार और ममता का रंग है.



राजडांगा, कस्बा

कस्बा इलाके के राजडांगा क्लब ने शटलकॉक और बेडमिंटन की मदद से पूजा पंडाल तैयार किया था. पूरे पंडाल में शटलकॉक बनाकर लगाए गए थे. मां की अद्भुत प्रतिमा ने भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया. इस पंडाल के थीम का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह बताना था कि शटलकॉक के निर्माण से पक्षियों को कितना अधिक नुकसान हो रहा है. पक्षियों के शरीर पर इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है. इस तरह की चीजों पर रोकथाम के लिए ही इस पंडाल की ओर से लोगों को संदेश दिया गया.



बेलेघाटा 33 पल्ली

सियालदह के नजदीक स्थित बेलेघाटा इलाके के 33 पल्ली क्लब ने इस बार सोहार्दता और भाईचारे को अपना थीम बनाया था. पूरे पंडाल में मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरुद्वारे की आकृतियां बनाई गई थी. पंडाल में आने वाले लोगों को यह बताया जा रहा था कि दुर्गा पूजा किसी एक धर्म के लिए नहीं बल्कि सभी धर्मों के लिए समान है. यह एक उत्सव है जिसे सभी भारतीय एकसाथ मिलकर मना सकते हैं. एक दूसरे की खुशियां बांट सकते हैं. भाईचारे के साथ उत्सव का हिस्सा हो सकते हैं.



हरिसभा, इच्छापुर

इच्छापुर का हरिसभा क्लब एक बहुत ही पुराना क्लब है जिसे एक छोटे से इलाके के कई बड़े बुजुर्गों ने मिलकर शुरू किया था. इस पूजा की खासियत यही है कि इसमें घर के बूढ़े लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं. ये दुर्गा पूजा भले ही एक छोटे से इलाके में मनाई जाती हो लेकिन उस इलाके में रहना वाला प्रत्येक परिवार पूरे दिल के साथ इसमें हिस्सा लेता है. मां दुर्गा के लिए भोग बनाने से लेकर पूजा का सामान इक्ट्ठा करने तक का सारा काम घर के सदस्य मिलकर ही करते हैं. दूसरे पूजा पंडालों में साज सज्जा या पूजन का काम किराए पर रखे गए कुछ लोगों या कर्मचारियों से कराया जाता है लेकिन हरिसभा की पूजा में सारा काम कमिटी के लोग और उनके परिवार के सदस्य खुद मिलकर करते हैं. इस साल उन्होंने 71वां दुर्गा पूजा उत्सव मनाया.

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दमदम पार्क तरुण संघ

यहां के पूजा पंडाल में ग्लोबल वॉर्मिंग की एक भयावह तस्वीर को लोगों के सामने पेश किया गया. इस पूजा पंडाल में लोगों को संदेश दिया गया कि अगर ऐसे ही पेड़ों को काटकर घर बनाए जाते रहे तो एक दिन इस पृथ्वी पर कुछ नहीं बचेगा. सब खत्म हो जाएगा. चारों तरफ कीड़े मकोड़े रेंगते नजर आएंगे. धरती भी यह भार नहीं उठा पाएगी और सब नष्ट कर देगी. चारों तरफ तबाही होगी. पंडाल की साज सज्जा से लोगों को यह बताने की कोशिश की गई कि जितना हो सके पेड़ों को बचाएं तभी लोग स्वस्थ और खुशहाल रह सकेंगे.

(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)