आधा दर्जन फ़्लॉप फ़िल्में देने के बाद खुद को बड़ा स्टार मानने लगे हैं अली फजल

आधा दर्जन फ़्लॉप फ़िल्में देने के बाद खुद को बड़ा स्टार मानने लगे हैं अली फजल
2009 में थ्री इडियट जैसी कमर्शियल सुपरहिट फ़िल्म से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता अली फजल (Ali Fazal) अब तक ‘आलवेज कभी कभी ‘ ‘बात बन गयी’ ‘बॉबी जासूस’ ‘सोनाली केबल’ ‘ख़ामोशियां’ ‘मिलन टाकीज़’ जैसी आधा दर्जन से ज़्यादा फ़्लॉप फ़िल्में दे चुके हैं और अब अली एक हिट फ़िल्म के लिए तड़प रहे हैं.

बड़े स्टार्स के साथ काम कर चुके हैं अली
अली को बड़े -बड़ें स्टार्स ने अपनी फ़िल्मों में मौक़ा दिया. थ्री इडियट के बाद अली को शाहरुख़ खान के प्रोडक्शन हाउस ने फ़िल्म ‘आलवेज कभी कभी’ में बतौर सोलो हीरो कास्ट किया. लेकिन यह फ़िल्म बाक्स ऑफ़िस पर औंधे मुंह गिरी. इसके बाद अली को विद्या बालन जैसी सुपरहिट फ़िल्मे देने वाली अभिनेत्री के साथ लीड रोल में फ़िल्म बॉबी जासूस में काम करने का मौक़ा मिला. लेकिन अली की यह फ़िल्म भी फ़्लॉप ही साबित हुई.

अली ने अपने करियर की शुरुआत लगभग अभिनेता राजकुमार राव, आयुष्मान खुराना के साथ ही की थी. आयुष्मान और राजकुमार राव फ़िल्म इंडस्ट्री की नई ऊंचाइयां छू रहे हैं. अली फजल को फ़िल्में ज़रूर मिल रही हैं लेकिन इसके बावजूद दर्शक इन्हें राजकुमार राव और आयुष्मान खुराना की तरह बतौर सोलो हीरो स्वीकार ही नहीं पाते.
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फुकरे अली फजल की हिट फिल्म रही थी.


भले ही दर्शकों की पसंद के चलते अली बाक्स ऑफ़िस पर एक कामयाब स्टार की गिनती में ना हों लेकिन अली का मीडिया से रवैया किसी सुपरस्टार से क़तई कम नहीं है.अली आजकल इवेंट्स पर लेट पहुंचते हैं और उसके बाद भी अली की उम्मीद होती है कि मीडिया अली से उनके मन-मुताबिक़ ही सवाल और उसी हिसाब से बातचीत करे.

पब्लिसिटी के मामले में आगे हैं अली फजल
इस साल दुबई में 28 फरवरी से 2 मार्च तक होने वाले 'जश्न ए रेख्ता' के उर्दू फेस्टिवल में अली भी हिस्सा बनने वाले थे लेकिन 14 फ़रवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के कारण इस इवेंट को 15 फ़रवरी को ही ‘जश्न ए रेख्ता’ की टीम ने कैंसल कर अभी स्टार्स को इन्फ़ॉर्म कर दिया था, लेकिन जब पुलवामा से जुड़ी सुर्खियों आने लगीं, तब अली फजल ने अपनी टीम के जरिए तीन दिन बाद 18 फरवरी की दोपहर मीडिया को जानकारी भेजी कि अली को दुबई में आयोजित होने वाले 'जश्न ए रेख्ता' के 5वें संस्करण में हिंदी फिल्मों में उर्दू भाषा के उपयोग और प्रचार के बारे में बात करने के लिए आमंत्रित किया गया था. हालांकि पुलवाना में हुए भयावह हमलों के कारण, अली ने भारतीय जवानों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाने के लिए कार्यक्रम से हटने का फैसला किया. हाल के वर्षों में हुए सबसे अमानवीय हमले के कारण अली सदमे में थे और ऐसे समय में इस कार्यक्रम के आयोजन के प्रति आयोजकों से मिलकर अपनी नाराजगी भी जताई और खुद को कार्यक्रम से अलग कर लिया.

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अली के इस स्टेटमेंट पर तुरंत जब ‘जश्न ए रेख्‍ता’ के इवेंट से जुड़ी टीम ने टिप्पणी की तो अली ने बातचीत कर तुरंत मामले को सुलझा दिया और अपने स्टेटमेंट को पब्लिसिटी टीम पर थोप दिया.

ऐसा क़तई नही है कि अली फजल को पब्लिसिटी की ज़रूरत नहीं है लेकिन अली को लगता है कि वह अब थोड़े स्टार्स वाले नाजों-नख़रों के साथ मीडिया से बात करेंगे तो मीडिया उनको बहुत ज़्यादा अटेंशन देगी. अली शायद भूल गए कि इनके इस एटिट्यूड के चक्कर में मीडिया ने तवज्जो देनी बंद कर दी तो उनके स्टारडम को काफ़ूर होते देर नहीं लगेगी.

(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)