Analysis: मोदी-जिनपिंग मुलाकात में छुपा है क्या संदेश

Analysis: मोदी-जिनपिंग मुलाकात में छुपा है क्या संदेश
चीन (China) के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (XI Jinping) का महाबलीपुरम (Mahabalipuram) में भव्य स्वागत हुआ है. हवाई अड्डे से लेकर देर शाम स्वागत और बातचीत का ऐसा दौर चल रहा है जिसे देख कर दुनिया को अचरज हो रहा होगा. बातचीत अनौपचारिक है जिसका कोई तय एजेंडा नहीं है फिर भी पाकिस्तान (Pakistan) के माथे पर बल पड़ रहे होंगे और हौसले पस्त.

पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की कूटनीति अब रंग लाने लगी है. एक महीने में दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान डोनाल्ड ट्रंप के साथ मंच साझा किया, रुसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ चर्चा भी कर ली और अब दूसरी महाशक्ति चीन के राष्ट्रपति का महाबलीपुरम के समुद्र तट पर एक ऐसी जगह पर स्वागत कर रहे है जो प्राचीन काल से ही भारतीय सभ्यता, संस्कृति और व्यापार का केन्द्र रहा है.

पीएम मोदी चीन समेत दुनिया भर के देशों को यही संदेश देना चाहते थे कि ये 1300 साल पुराने मंदिर सिर्फ संग्रहालय नहीं है बल्कि हमारी संस्कृति की जीती जागती धरोहर हैं.

महाबलीपुरम एक महत्वपूर्ण बंदरगाहमहाबलीपुरम प्राचीन काल से ही एक महत्वपूर्ण बंदरगाह रहा है. पल्लव वंश के दौरान ये और निखरा. पहली शताब्दी से ही चीन के जहाज व्यापार के लिए तमिलनाडू के बंदरगाहों पर आते थे. चीनी यात्री फा ह्यान ने इन बंदरगाहों और पल्लव राजाओं की भव्य राजधानी का काफी व्यापक जिक्र किया है. महाबलीपुरम नाम मामल्लपुरम से ही आया है जो कि 7वीं सदी में पल्लव राजा नरसिंहवर्मन को दिए गए नाम से निकला था.

महाबलीपुरम अपने मंदिरों, रथों, पत्थर में बनी गुफओं के लिए मशहूर है. ये दक्षिण भारत के उन अनुठे इलाकों में से जहां-जहां महाभारत की कहानियों से जुडे अवशेष मिले हैं. इनकी खास बात ये है कि इन मंदिरों में कहीं भी शिकार के चित्र नहीं हैं.

जानवरों के कम से कम ऐसे 20 चित्र मिले हैं जिसमें हिंसा का चित्रण है ही नहीं. यानि दुनिया को संदेश ही है प्रचीन भारत की संस्कृति और धरोहर ही यही है कि हिंसा हमारी सभ्यता का हिस्सा कभी नहीं रहा. ये संदेश चीन को भी गया होगा और दुनिया को भी.
रात्रि भोज का भी आयोजन
चीन के राष्ट्रपति के लिए रात्रि भोज का भी आयोजन कुछ ऐसा ही हुआ है. टेस्ट ऑफ इंडिया नाम से पूरा का पूरा भारतीय मेन्यू परोसा गया है जिसमें खाने की मेज पर दक्षिण भारतीय खाने की हर पहचान मौजुद रहेगी. सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रम में भी भारतीय संस्कृति को ही परोसने की तैयारी है.इस कार्यक्रम का जिम्मा सौंपा गया रुक्मिणी देवी अरुणडेल द्वारा 1936 में स्थापित सांस्कृतिक केन्द्र कलाक्षेत्र को है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा शुरु की गयी इन अनौपचारिक मुलाकात को पीएम मोदी ने इतना बड़ा बना दिया कि संदेश सिर्फ चीन को नहीं बल्कि दुनिया भर के देशों को गया.

चीन को संदेश ये कि भारत चीन संबध सदियों पुराने हैं. यहां तक की व्यापार और वाणिज्य का रिश्ता भी प्रचीन काल से ही चला आ रहा है. ऐसे में तल्खी भुला कर व्यापार और बाजार बढाने पर दोनो देश ध्यान दें तो मुश्किलें आसान हो जाएंगी.

भारत एक बहुत बड़ा बाजार
उसके उत्पादों के लिए चीन भी जानता है कि भारत एक बहुत बड़ा बाजार है. अगर चीनी वस्तुओं का बहिष्कार होता है तो नुकसान उनका ही होगा. शायद यही समझा पाने में और संदेश देने में पीएम मोदी धीरे धीरे सफल हो रहे हैं कि सीमा विवाद तो अंग्रेजों का दिया है जो वक्त के साथ साथ बात चीत कर के सुलझ ही जाएगा लेकिन जब पड़ोसी बदल नहीं सकते तो कंधे से कंधा मिला कर चलने में हर्ज ही क्या है.

ऐसे मे पाकिस्तान को खुल कर समर्थन देने वाला चीन ने भी अपने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा से ठीक पहले कह दिया कि कश्मीर मुद्दे को भारत पाकिस्तान ही बातचीत कर सुलझा लें. भारत ने हर फोरम पर कश्मीर पर अपने कड़े तेवर जाहिर कर दिए हैं और ताकतवर देशों का समर्थन भी हासिल कर लिया है. ऐसे में ये यात्रा भविष्य के सुलझते भारत चीन रिश्तों की नींव जरुर तैयार करेगी. आखिर बातचीत से कौन सी समस्या हल नहीं होती.

पीएम मोदी कुटनीति अब रंग लाने भी लगी है. चाहे संयुक्त राष्ट्र संघ हो या फिर कोई और फोरम भारत को दरकिनार करना अब किसी भी देश के बस की बात नहीं. भारत अब आँख में आँख डाल कर बातें करता है. जाहिर है शी जिनपिंग की यात्रा अनौपचारिक ही सही ये भव्य स्वागत जिसमें सीमा विवाद की तल्खी नहीं शायद ऐसी छाप छोड जाए जो आने वाले दिनों में भारत चीन संबंधों में कोई नया आयाम ही जोड़ दे.

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(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from News 18.)